बिहार के सासाराम में जमीन रिकॉर्ड में गड़बड़ी से परेशान बुजुर्ग महिला न्याय के लिए दर-दर भटक रही

 


--26 एकड़ जमीन आखिर कौन कर रहा मैनेज!

सासाराम,25 अप्रैल (हि.स.)। नियम-कानून और सिस्टम आखिर किस काम के,जब पीड़ित को न्याय ही न मिल सके। यह पीड़ा उम्र की आखिरी दहलीज पर खड़ी बुजुर्ग महिला आशा पांडेय की है। बीमारी से जूझ रही महिला की स्थिति ऐसी है कि वह न्याय के लिए दर—दर भटक रहीं हैं, फिर भी न्याय नहीं मिल रहा।

मामला रोहतास जिले के कोचस प्रखंड के सरेयां गांव का है,जहां 26 एकड़ पैतृक जमीन को सगी छोटी बहन पदमावती मिश्रा ने कागजी जालसाज करके हड़प लिया है। पीड़ित महिला ने शासन-प्रशासन और लोक अदालत तक गुहार लगाई,पर आज तक न्याय नहीं मिल पाया। उम्र और बीमारी के चलते अब वे आगे भागदौड़ करने की स्थिति में भी नहीं हैं। ऐसे में जन-जन तक न्याय पहुंचाने का दावा करने वाली सरकार से उन्हें आखिरी उम्मीद है। यह मामला शासन के लिए न सिर्फ अवसर,बल्कि चुनौती भी है।

वर्ष 2011 में शुरू हुआ पूरा विवाद?

दरअसल, कोचस प्रखंड के सरेयां गांव निवासी स्व.मारकण्डेय तिवारी की 26 एकड़ पैतृक संपत्ति जो कभी परिवार की एकता का प्रतीक थी,आज आरोप-प्रत्यारोप और साजिश की कहानी बन गई है। इस जमीन पर स्व.तिवारी का एकक्षत्र अधिकार था। 26 जून 1999 को उनके निधन के बाद उनकी संपत्ति 26 एकड़ 1 डिसमिल भूमि पर विधवा पत्नी राधिका कुंवर और तीन पुत्रियां आशा पांडेय, शीला त्रिगुण और पद्मावती मिश्रा कानूनी वारिस के रूप में स्वामित्व में आईं। सब कुछ सामान्य चल रहा था,लेकिन वर्ष 2011 में विवाद तब गहरा गया,जब आशा पांडेय को कथित तौर पर जालसाजी की जानकारी मिली। आरोप है कि कागजी हेरफेर कर पूरी संपत्ति को एक के पक्ष में करने की कोशिश की गई।

2012 में लोक अदालत ने खारिज की 'डिग्री'

आशा पांडेय का आरोप है कि पद्मावती मिश्रा ने जाली हस्ताक्षर के आधार पर पूरी संपत्ति अपने नाम कराने का प्रयास किया। इस पर आशा पांडेय ने लोक अदालत सासाराम में मामला दायर किया। 16 मार्च 2012 को लोक अदालत ने उक्त डिक्री को निरस्त करते हुए कहा कि अदालत को गलत जानकारी देकर संधि पत्र स्वीकृत कराया गया था। इसके बाद विधवा राधिका कुंवर और तीनों पुत्रियों के नाम से खारिज-दाखिल हुआ और मालगुजारी रसीद भी चारों के नाम से कटने लगी।

मां-बेटों ने रचा खेल,गैर कानूनी कार्यों में अंचलाधिकारी का मिला सह

मामला यहीं नहीं रुका । पद्मावती ने पुन: 2016 में सम्पत्ति हड़पने के नियत से अंचलाधिकारी को अपने पक्ष में लेकर पुन: जालसाजी किया और तीनों बहनों की सम्पत्ति अपने व अपने पुत्रों निखिल कुमार मिश्रा और राहुल कुमार मिश्रा के नाम पर राजस्व अभिलेख में दर्ज करा लिया। फिर 26 एकड़ 1 डिसमिल में से 19 एकड़ 23 डिसमिल भूमि का मालगुजारी रसीद निखिल व राहुल के नाम कटने लगा। साथ ही 6 एकड़ 78 डिसमिल भूमि का मालगुजारी रसीद पद्मावती के नाम कटने लगा। यह पूरा खेल इतने गुप्त तरीके से किया गया कि इस पूरी प्रक्रिया की भनक तक अन्य बहनों को नहीं लगी और उनके नाम रिकॉर्ड से हटा दिए गए।

आशा पाण्डेय ने बताया कि किडनी (गुर्दा) व सुगर की बीमारी से परेशान हूं। ऐसे में भागदौड़ करना मुश्किल है,आर्थिक संकट भी है। मैं अपने हिस्से की जमीन दयाशंकर तिवारी, कृपा निधान तिवारी,रजनीकांत तिवारी, मालती देवी, आरती देवी, मनीष तिवारी समेत अन्य लोगों को बेच दिया है। शासन से मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर भू-माफियाओं को कठोरतम सजा दी जाय। दण्डित किया जाय।

उन्होंने बताया कि कोचस अंचल कार्यालय न तो खरीदी गई जमीन का नामांतरण कर रहा है और न ही यह स्पष्ट कर रहा है कि तीन बहनों की संपत्ति एक बहन और उसके पुत्रों के नाम कैसे दर्ज हो गई। उन्होंने कहा कि मां के जीवित रहते ननिहाल की संपत्ति में बेटों का सीधा अधिकार नहीं होने के बावजूद उनका नाम राजस्व रिकॉर्ड में कैसे दर्ज हुआ? और अगर पहले लोक अदालत डिग्री को निरस्त कर चुकी थी तो फिर रिकॉर्ड में यह बदलाव किस आधार पर हुआ?

आशा पांडेय ने आरोप लगाया कि पद्मावती व उसके पुत्रों ने सिस्टम की आंखों में धूल झोंक कर गैर कानूनी कार्य किया है। उन्होंने शासन से मांग की है कि गंभीरता से प्रकरण की जांच हो और ऐसे भू-माफिया और धोखाधड़ी व कानून से खिलवाड़ करने वालों को सख्त से सख्त सजा मिले।

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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी