संस्कारयुक्त बालिका शिक्षा ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला : रामलाल सिंह
सीवान, 03 अगस्त (हि.स.)। विद्या भारती की इकाई लोक शिक्षा समिति, बिहार के तत्वावधान में सोमवार को शहर के माधव नगर स्थित महावीरी सरस्वती बालिका विद्या मंदिर में प्रांत स्तरीय बालिका शिक्षा योजना बैठक का आयोजन किया गया।
बैठक में उत्तर बिहार प्रांत के विद्या भारती से जुड़े विद्यालयों की लगभग तीन दर्जन शिक्षिकाओं, शिक्षाविदों एवं अधिकारियों ने बालिका शिक्षा के विविध आयामों पर गहन विचार-विमर्श किया तथा भविष्य की कार्ययोजना तय की। बैठक का शुभारंभ लोक शिक्षा समिति, बिहार के प्रदेश सचिव रामलाल सिंह, विद्या भारती बिहार के कार्यकारिणी सदस्य डॉ. शरद चौधरी, विभाग संयोजक प्रो. रविन्द्र पाठक, बालिका शिक्षा की क्षेत्रीय प्रमुख शर्मिला कुमारी, विद्यालय की अध्यक्षा डॉ. ममता सिंह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रचारक बसंत कुमार तथा बालिका शिक्षा के प्रांतीय मार्गदर्शक कृष्ण कुमार प्रसाद ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। विद्यालय की प्रधानाचार्या सिम्मी कुमारी ने अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया।
बालिका शिक्षा की क्षेत्रीय प्रमुख शर्मिला कुमारी ने कहा कि बालिका शिक्षा केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि संस्कारित, सशक्त और समृद्ध राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि शिक्षित बालिका आत्मविश्वासी, आत्मनिर्भर और जागरूक नागरिक बनकर परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विद्या भारती का उद्देश्य केवल शैक्षणिक उपलब्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि बालिकाओं के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास कर उन्हें जीवन की हर चुनौती का आत्मविश्वास के साथ सामना करने योग्य बनाना है।
प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करते हुए लोक शिक्षा समिति, बिहार के प्रदेश सचिव रामलाल सिंह ने कहा कि विद्या भारती बालिका शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण आधार मानते हुए संस्कारनिष्ठ एवं समग्र शिक्षा व्यवस्था का संचालन कर रहा है। उन्होंने बताया कि देशभर में संचालित 13,067 विद्यालयों में 34.75 लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें 14.41 लाख से अधिक बालिकाएं शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और जीवन-दर्शन पर आधारित शिक्षा व्यवस्था में नेतृत्व विकास, आत्मरक्षा, स्वास्थ्य, किशोरावस्था परामर्श, गृह प्रबंधन, व्यावसायिक शिक्षा, जीवन-कौशल, राष्ट्रभक्ति और परिवार भावना जैसे विषयों पर विशेष बल दिया जाता है। बैठक की अध्यक्षता करते हुए विद्यालय की अध्यक्षा डॉ. ममता सिंह ने कहा कि मोबाइल फोन ने जीवन को सुविधाजनक अवश्य बनाया है, लेकिन इसके अत्यधिक उपयोग से परिवारों में भावनात्मक दूरी भी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति परिवार को जोड़ने वाली सबसे मजबूत कड़ी है। यदि घर में संवाद, सामूहिक भोजन, प्रार्थना, पुस्तक-पठन और सीमित मोबाइल उपयोग की संस्कृति विकसित की जाए तो बच्चों में अनुशासन, आत्मीयता और पारिवारिक संस्कार स्वतः विकसित होंगे। उन्होंने परिवार को सशक्त बनाने में मातृशक्ति की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। बैठक में महावीरी सरस्वती शिशु मंदिर, सिवान के अध्यक्ष रमेश कुमार सिंह, महावीरी विद्यालय बरहन गोपाल के अध्यक्ष ओमप्रकाश दुबे, विभाग निरीक्षक अनिल कुमार राम, क्षेत्रीय प्रचार-प्रसार संयोजक नवीन सिंह परमार, आशा रंजन, कौशलेंद्र प्रताप, प्रेम शंकर तिवारी, पारस नाथ सिंह, अरविंद कुमार, राजीव कुमार सिंह, विजय प्रसाद, डॉ. के.के. दूबे, अतुल कुमार श्रीवास्तव, डॉ. कुमार विजय रंजन, कमलेश नारायण सिंह, शम्भू शरण तिवारी, रविन्द्र राय, सुमन कुमारी सहित स्थानीय विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / Amar Nath Sharma