स्मार्ट सिटी में 3.40 करोड़ के ई-टॉयलेट घोटाला, ठेकेदार रिशुश्री पर शिकंजा

 




भागलपुर, 04 जून (हि.स.)।

मनी लांड्रिंग और टेंडर घोटाले में फंसे रिशु श्री की जांच की आंच भागलपुर तक पहुंच गई है। रिशु श्री की रिलायबल कंपनी ने भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड से लाखों-करोड़ों की डील की है।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में 3.40 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत वाली 25 यूनिट ई-टायलेट निर्माण का ठेका रिशु श्री की कंपनी रिलायबल इंटरप्राइजेज-रिलायबल इंफ्रा सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया।

इसमें महज एक टायलेट की लागत 13 लाख रुपये से अधिक बताई गई। हालांकि, स्मार्ट सिटी का सबसे असफल कार्य ई-टायलेट ही रहा।

चालू होने के कुछ दिनों में सभी ई-टायलेट कबाड़-ध्वस्त हो गए। जिस समय यह कार्य हुआ उस दौर में उसके नजदीकी डॉ. योगेश सागर नगर निगम के नगर आयुक्त थे। जिनकी भूमिका की जांच कराने पर बड़ा मामला सामने आ सकता है।

करीब साढ़े तीन करोड़ में सिर्फ 50 लाख रुपये का भुगतान लंबित है। जिसे स्मार्ट सिटी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के आदेश से जब्त कर लिया गया है।

उक्त बकाया राशि जब्त करते हुए रिशु श्री की कंपनी का एकरारनामा भी रद्द किया गया है। इस बीच स्मार्ट सिटी द्वारा कई बार पत्राचार भी किया गया। जिसके बाद भी कबाड़ बने ई-टायलेट का रखरखाव नहीं किया गया।

राशि जब्त करने के बाद इस वर्ष नौ फरवरी को इशाकचक थाने में रिलायबल इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर रिशु श्री पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर अत्याधुनिक ई-टॉयलेट स्थापित करने की योजना बनाई थी। लाजपत पार्क, तिलकामांझी, कचहरी चौक, घंटाघर, कोतवाली चौक, आदमपुर चौक, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड सहित 12 स्थानों पर कुल 25 ई-टॉयलेट लगाए गए थे।

परियोजना के तहत ऑटोमैटिक दरवाजे, सेंसर आधारित फ्लशिंग सिस्टम, ऑटो क्लीनिंग तकनीक, स्मार्ट वाटर मीटर और आधुनिक इलेक्ट्रिकल सिस्टम जैसी सुविधाओं का दावा किया गया था। उद्देश्य था कि शहरवासियों और बाहर से आने वाले यात्रियों को स्वच्छ और आधुनिक शौचालय सुविधा उपलब्ध कराई जाए। लेकिन कुछ ही वर्षों में यह महत्वाकांक्षी योजना दम तोड़ती नजर आ रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर