कोसी और गंगा की दोहरी मार: रंगरा के सधुवा और चापर में फसलें तबाह

 


भागलपुर, 26 सितंबर (हि.स.)। जिले के नवगछिया अनुमंडल अंतर्गत रंगरा प्रखंड में कोसी और गंगा नदी के जलस्तर में हुई अप्रत्याशित वृद्धि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। प्रखंड के सधुवा और चापर गांव के आसपास का एक बड़ा भू-भाग पूरी तरह बाढ़ के पानी की चपेट में आ गया है।

खेतों में कई फीट पानी जमा होने के कारण सैकड़ों एकड़ में लगी और पककर तैयार खड़ी फसलें पूरी तरह डूबकर बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। इस तबाही ने क्षेत्र के सैकड़ों किसान परिवारों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है।

सधुवा और चापर गांव के जलमग्न खेतों को देखकर किसानों की आंखों में आंसू साफ देखे जा सकते हैं। किसानों ने बताया कि उन्होंने इस बार बेहतर उपज की उम्मीद में महंगे दाम पर बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर अपनी जमा-पूंजी लगा दी थी। कई किसानों ने महाजनों और बैंकों से कर्ज लेकर खेती की थी। अब फसल के पूरी तरह पानी में डूब जाने से उनकी महीनों की मेहनत और लागत दोनों पर पानी फिर गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि कृषि ही उनके जीवनयापन का एकमात्र सहारा है। चापर गांव के किसानों ने दर्द बयां करते हुए कहा, हमें उम्मीद थी कि फसल बेचकर न सिर्फ परिवार का खर्च चलाएंगे, बल्कि खेती के लिए लिया गया कर्ज भी समय पर चुका देंगे। लेकिन कुदरत की इस मार ने हमें कहीं का नहीं छोड़ा। अब महाजनों का कर्ज कैसे चुकाएंगे और आने वाले दिनों में बच्चों का पेट कैसे पालेंगे, यही चिंता रात-दिन सता रही है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यदि बाढ़ का पानी जल्द उतर भी जाता है, तो खेतों में लंबे समय तक जलजमाव रहने के कारण मिट्टी की उर्वरा शक्ति और कृषि कार्य प्रभावित होना तय है। जमीन को सुखाने और दोबारा खेती योग्य बनाने में महीनों का समय लगेगा। ऐसे में किसानों को आगामी रबी या अन्य फसलों की तैयारी के लिए भारी अतिरिक्त आर्थिक मदद की जरूरत पड़ेगी, जो फिलहाल उनके पास नहीं है।

बाढ़ की इस विभीषिका से त्रस्त सधुवा और चापर के किसानों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से तत्काल राहत की गुहार लगाई है। किसानों ने मांग की है कि कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन अविलंब खेतों का भौतिक सर्वेक्षण (सर्वे) कराए। वास्तविक नुकसान का सही आकलन कर सरकारी प्रावधानों के तहत उचित मुआवजा और कृषि इनपुट अनुदान सीधे प्रभावित किसानों के खातों में भेजा जाए।

किसानों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो क्षेत्र में भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। फिलहाल, तबाही के इस मंजर के बीच किसानों की उम्मीदें अब सरकार और प्रशासनिक मदद पर टिकी हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर