मृत्यु उपरांत नेत्रदान कर परिजनो ने सीमाई क्षेत्र में कायम की प्रेरणादायी मिसाल

 


पूर्वी चंपारण,30 मई (हि.स.)। जिले के रक्सौल शहर से सटे नेपाल के बीरगंज में दो परिवारों ने अपने परिजनों के मरणोपरांत नेत्रदान कर मानवता, सेवा और सामाजिक जागरूकता की प्रेरणादायी मिसाल पेश की है।

बीरगंज निवासी स्व. शंकरलाल सरावगी के पुत्र आशीष एवं प्रदीप सरावगी तथा स्व. लक्ष्मण बहादुर श्रेष्ठ के पुत्र सुदर्शन श्रेष्ठ ने अपने परिजनों के मरणोपरांत नेत्रदान की सहमति देकर दो जरूरतमंद लोगों के जीवन में नई रोशनी का मार्ग प्रशस्त किया।

तेरापंथ युवक परिषद, बीरगंज के सहयोग से केडिया आंख अस्पताल की चिकित्सकीय टीम ने सफलतापूर्वक नेत्र संकलन किया। सीमावर्ती भारत-नेपाल क्षेत्र में नेत्रदान के प्रति बढ़ती जागरूकता को समाज के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

लायंस इंटरनेशनल के आजीवन सदस्य लायन राधेश्याम खेतान ने दोनों परिवारों के इस निर्णय को मानवता की सच्ची सेवा बताते हुए नमन किया। वहीं लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी बिमल सर्राफ ने कहा कि सेवा ही सत्य है तथा नेत्रदान मृत्यु के बाद भी जीवन को सार्थक बनाने का सर्वोत्तम माध्यम है।

उन्होंने यह भी कहा कि आँख भले बंद हो जाए लेकिन नेत्रदान के माध्यम से किसी की दुनिया हमेशा के लिए रोशन की जा सकती है।

भारत विकास परिषद शाखा-रक्सौल के अध्यक्ष रजनीश प्रियदर्शी ने कहा कि मृत्यु अंत नहीं, बल्कि किसी अन्य जीवन में आशा और प्रकाश का नया आरंभ भी बन सकती है। नेत्रदान जैसे महादान के माध्यम से व्यक्ति इस दुनिया से जाने के बाद भी किसी की अंधकारमय दुनिया को रोशन कर सकता है।

उन्होंने सभी लोगों से मरणोपरांत नेत्रदान का संकल्प लेने का आह्वान किया।

नेपाल के प्रथम अंतरराष्ट्रीय निदेशक ई. लायन संजय खेतान, प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय निदेशक लायन राजन लामसाल, पूर्व अंतर्राष्ट्रीय निदेशक लायन बालकृष्ण बुरलाकोटी, मल्टीपल काउंसिल चेयरमैन लायन केशर भंडारी, जिलापाल लायन विनय बस्नेत,जिलापाल लायन नवराज सापकोटा,लायन सुशीला शाह, लायन नरोत्तम पाण्डेय, लायन पिया सिंह, लायन प्रसिद्धि आनंद सिंह, नेपाल के रोटेरियन, भारत विकास परिषद शाखा- रक्सौल के संपर्क संयोजक उमेश सिकारिया सहित लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के साथ अनेक सामाजिक संगठनों एवं मानवता प्रेमियों ने दोनों दिवंगत दानवीरों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

हिन्दुस्थान समाचार / आनंद कुमार