खुदाई में निकले पहली सदी के तिलाधक विश्वविद्यालय का डीएम ने लिया जायजा

 


नालंदा, बिहारशरीफ 19 जनवरी (हि.स.)। बिहार में नालन्दा जिले के जिलाधिकारी ने नालंदा जिले के एकंगरसराय प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायती राज तेलहाड़ा ग्राम में खुदाई में निकले पहली सदी के तिलाधक विश्वविद्यालय का जायजा लेने सोमवार को पहुंचे।

इस संबंध में दी गई जानकारी के मुताबिक नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना 453 ईसा पूर्व में गुप्त शासक कुमार गुप्त ने की थी।जबकि तिलाधक विश्वविद्यालय पहली सदी का था। तेल्हारा भ्रमण के दरम्यान मंचीय कार्यक्रम में तत्कालीन मुखिया अवधेश गुप्ता की मांग पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 26 दिसंबर 2009 को तेल्हारा स्थित टीले पर चढ़कर अपने हाथों से खुदाई के काम का शुभारंभ किया था। खुदाई में सबसे पहले पाल कालीन मूर्तियां निकली थी वहीं बीच में गुप्तकालीन पुरातात्विक अवशेष निकले हैं जब गहरी खुदाई की गई तो कुषाणकालीन मूर्तियां और अवशेष मिले हैं।

कार्बन डेटिंग में यह ईसा पूर्व का बताया गया है। खुदाई में सैकड़ो मॉनास्ट्री सील, अभिलेख , भगवान बुद्ध अवलोकेतेश्वर, चामुंडा, हरितिका, मां तारा अपराजिता आदि टेराकोटा की मूर्तियों एवं बर्तन मिली। प्रसिद्ध चीनी यात्री हेनसांग 630 ई में जब चीन से भारत आया था तो सर्वप्रथम वह नालंदा विश्वविद्यालय से पहले तिलाधक विश्वविद्यालय आया था। उसने तिलाधक संघाराम, महाविहार, सह विश्वविद्यालय का बहुत ही सुंदर चित्रण अपनी भारत यात्रा वृतांत में किया है।

भगवान बुद्ध तेल्हारा में जब चौमास बिताने आए थे तब बीमार पड़ गए थे तब तेल्हारा के तत्कालीन अध्यक्ष विष्णु तेली ने सफल इलाज करवाया था। पहले सदी का तिलाधक विश्वविद्यालय का वर्णन जेनिस लिबासको, मेजर कीटो, बुकानन, हैमिल्टन ब्लॉक, बेगलर, सैमुअल बिल,पुरातत्व के पितामह लॉर्ड कनिंघम, आदि पाश्चात्य के पुरातत्व वेताओं ने किया है। नालंदा विश्वविद्यालय में ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई होती थी। उसके ऊपर पीएचडी करने विद्यार्थी तिलाधक विश्वविद्यालय आते थे।यहां 1000 विद्यार्थी महायान की पढ़ाई करते थे जो विभिन्न देशों के थे। 1198 ई०सी० मे इख्तियारूद्दीन मोहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने तिलाधक विश्वविद्यालय में पढ़ रहे बौद्धों का कत्लेआम करने के बाद लूट कर आग लगा दिया इस तरह यह विश्वविद्यालय नष्ट हो गया।

मालूम हो कि यहां शब्द विद्या, शिल्प विद्या, तर्क शास्त्र, चिकित्सा शास्त्र, सांख्यिकी, बौद्ध साहित्य और दर्शन आदि विषयों की पढ़ाई होती थी। ब्रिटिश काल के समय यहां की मूर्तियों को कोलकाता संग्रहालय लंदन संग्रहालय एवं ज्यूरिक म्यूजियम स्विट्जरलैंड में रखी गई है। तेल्हारा उत्खनन परिसर में अवलोकेटटेश्वर की मूर्ति जो रेड सैंड स्टोन की थी वह निकली जिसे बिहार म्यूजियम, पटना में रखा गया है जिसे देखने के लिए आज भी लोग जुटे रहते हैं।

जिलाधिकारी 9 करोड़ 80 लाख की लागत से भवन निर्माण बिहार सरकार द्वारा बने साइट म्यूजियम का अवलोकन किया जहां खुदाई में निकले पुरातात्विक अवशेषों को रखा जाना है। अभी भी खुदाई का काम बाकी रह गया है खुदाई में निकले पहले सदी के तिलाधक विश्वविद्यालय का कन्वर्जन किया जाना बाकी है।

म्यूजियम के अंदर का कंपार्टमेंट बनाया जायेगा ताकि निकले अवशेष को प्रदर्शित किया जा सके तेलहाड़ा को बुद्धिस्ट सर्किट से जोड़ने की तैयारी है ताकि देश और विदेशों से सैलानी यहां आ सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रमोद पांडे