डीआईसीई पहल के तहत जवाहर नवोदय विद्यालय के विद्यार्थियों का क्षेत्रीय भ्रमण
सुपौल, 06 अक्टूबर (हि.स.)। पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, सुपौल के छात्र-छात्राओं ने मंगलवार को सुपौल अभियंत्रण महाविद्यालय और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई (पीडब्ल्यूएमयू), किशनपुर का भ्रमण किया।
‘नवाचार संस्कृति एवं उद्यमिता विकास’ (डीआईसीई) पहल के तहत आयोजित क्षेत्रीय भ्रमण एवं विचार सृजन कार्यशाला में विद्यार्थियों ने नवाचार, तकनीक और कचरा प्रबंधन की बारीकियों को समझा।
कार्यक्रम का आयोजन शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, नवाचार प्रकोष्ठ तथा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के मार्गदर्शन में डीआईसीई पहल की गतिविधि-2 के तहत किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत सुपौल अभियंत्रण महाविद्यालय के शैक्षणिक भ्रमण से हुई। यहां आयोजित विचार सृजन सत्र में मुख्य वक्ता एवं डीन अकादमिक डॉ. चंदन कुमार ने विद्यार्थियों को नवाचार और नए विचार विकसित करने की प्रक्रिया की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने आसपास की समस्याओं को पहचानकर उनके समाधान के लिए रचनात्मक विचार विकसित करने चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि किसी विचार को व्यवस्थित तरीके से विकसित कर परियोजना का रूप कैसे दिया जा सकता है।
विद्यार्थियों ने महाविद्यालय की विभिन्न आधुनिक प्रयोगशालाओं का भ्रमण कर वहां चल रहे तकनीकी कार्यों और प्रयोगों की जानकारी ली। महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने अपने नवाचार आधारित विचार और परियोजनाएं भी प्रस्तुत कीं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किसी नए विचार को व्यावहारिक परियोजना में कैसे बदला जा सकता है।
जवाहर नवोदय विद्यालय की प्राचार्या मीना मुर्मू ने कहा कि इस तरह के व्यावहारिक शैक्षणिक भ्रमण और कार्यशालाएं विद्यार्थियों में नवाचार, तार्किक सोच और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इससे विद्यार्थियों को नए विचार विकसित करने और उन्हें धरातल पर उतारने की प्रेरणा मिलेगी।
भ्रमण के दौरान शिक्षक डॉ. उमाशंकर, अजीत कुमार झा और शिक्षिका सुरुचि कुमारी विद्यार्थियों के साथ रहीं और उन्हें मार्गदर्शन दिया। इसके बाद विद्यार्थियों ने प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई (पीडब्ल्यूएमयू), किशनपुर का भ्रमण किया।
प्रखंड विकास पदाधिकारी पिंकी कुमारी और प्रखंड समन्वयक रूबी कुमारी ने विद्यार्थियों को कचरा प्रबंधन की विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी दी। विद्यार्थियों को बताया गया कि सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग कर उसका वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया जाता है। साथ ही अपशिष्ट पदार्थों के पुनर्चक्रण से उपयोगी वस्तुएं तैयार करने की प्रक्रिया भी समझाई गई। विद्यार्थियों ने पूरी प्रक्रिया को करीब से देखा और अधिकारियों से इससे जुड़े सवाल पूछे।
सुपौल अभियंत्रण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अच्युतानंद मिश्र ने कहा कि डीआईसीई पहल का उद्देश्य स्कूली स्तर पर ही विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से आगे बढ़ाकर व्यावहारिक और तकनीकी अनुभव देना है।
उन्होंने कहा कि प्रयोगशालाओं और पीडब्ल्यूएमयू के भ्रमण से विद्यार्थियों में नई सोच, उद्यमिता और नवाचार की भावना विकसित होगी। ऐसे कार्यक्रम भविष्य में उन्हें तकनीकी परियोजनाओं, नए उद्यम और सामाजिक समस्याओं के अभिनव समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करेंगे।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र