13,760 नीलाम पत्र वाद लंबित, ₹2,485 करोड़ से अधिक की राशि फंसी

 




सुपौल, 08 अक्टूबर (हि.स.)। जिले में लंबित नीलाम पत्र वादों के निष्पादन और सरकारी बकाया राशि की वसूली को लेकर गुरुवार को अपर समाहर्ता सच्चिदानंद सुमन की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में लंबित नीलाम पत्र वादों की स्थिति, वसूली की प्रगति, बॉडी वारंट एवं डिस्ट्रेस वारंट के निष्पादन सहित लंबे समय से लंबित मामलों की विस्तृत समीक्षा की गई। संबंधित प्रमाण-पदाधिकारियों द्वारा प्रस्तुत अद्यतन प्रतिवेदन के अनुसार 8 अक्टूबर 2026 तक जिले में कुल 13,760 नीलाम पत्र वाद लंबित हैं।

इन मामलों में करीब ₹2,485.93 करोड़ की राशि निहित है। वहीं सितंबर माह में कुल 637 नीलाम पत्र वादों का निष्पादन किया गया और करीब ₹5.96 करोड़ की राशि की वसूली की गई।

समीक्षा के दौरान अपर समाहर्ता ने सभी प्रमाण-पदाधिकारियों को लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन और प्रभावी राजस्व वसूली के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर निर्धारित समय-सीमा में निष्पादित किया जाए। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जो लंबे समय से लंबित हैं और जिनमें अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।

बैठक में बॉडी वारंट जारी किए गए मामलों की भी समीक्षा की गई। संबंधित अधिकारियों को वारंट के तामिला एवं निष्पादन की नियमित निगरानी करते हुए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। वहीं Distress Warrant से जुड़े लंबित मामलों में नियमानुसार कार्रवाई करते हुए अधिक से अधिक मामलों का निष्पादन करने का निर्देश दिया गया। अपर समाहर्ता ने सभी प्रमाण-पदाधिकारियों को प्रत्येक लंबित वाद की Case-wise समीक्षा करने को कहा। इसके तहत वाद की वर्तमान स्थिति, देनदार की स्थिति, वसूली की संभावना तथा अब तक की गई कार्रवाई का अद्यतन विवरण संधारित करने का निर्देश दिया गया।

बैठक में वैसे विभागों की भी समीक्षा की गई, जिनके अंतर्गत बड़ी संख्या में नीलाम पत्र वाद लंबित हैं। संबंधित पदाधिकारियों को लंबित मामलों की संख्या में कमी लाने और राजस्व वसूली में तेजी लाने के लिए विशेष प्रयास करने को कहा गया। अंचल स्तर पर लंबित नीलाम पत्र वादों की नियमित समीक्षा अंचलाधिकारी द्वारा करने तथा लंबित मामलों में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। साथ ही ऐसे मामलों की अलग सूची तैयार करने को कहा गया, जिनमें लंबे समय से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। इन मामलों में कार्रवाई की समीक्षा के साथ अनावश्यक विलंब के लिए जिम्मेदारी भी निर्धारित करने का निर्देश दिया गया।

अपर समाहर्ता ने स्पष्ट किया कि नीलाम पत्र वादों के निष्पादन में केवल मामलों की संख्या कम करना ही उपलब्धि नहीं माना जाएगा, बल्कि वास्तविक राजस्व वसूली को भी प्रमुख उपलब्धि के रूप में सुनिश्चित करना होगा। सभी संबंधित अधिकारियों को आगामी समीक्षा बैठक में वादवार प्रगति प्रतिवेदन के साथ उपस्थित होने तथा निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप की गई कार्रवाई का स्पष्ट विवरण प्रस्तुत करने को कहा गया। उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि नीलाम पत्र वादों के निष्पादन एवं सरकारी बकाया राशि की वसूली को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई करें। उन्होंने चेतावनी दी कि लंबित वादों की संख्या में कमी तथा सरकारी बकाया राशि की वसूली में अपेक्षित प्रगति नहीं होने की स्थिति में संबंधित पदाधिकारी की जवाबदेही निर्धारित की जाएगी।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र