जिला न्यायमंडल में लोक अदालत का हुआ आयोजन
सुपौल, 18 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुपौल के अध्यक्ष सह जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनंत सिंह के मार्गदर्शन में शनिवार, 18 जुलाई 2026 को सुपौल न्याय मंडल में वर्ष के प्रथम स्पेशल लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस विशेष लोक अदालत का उद्देश्य परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 से संबंधित चेक बाउंस के मामलों का आपसी सुलह एवं समझौते के आधार पर त्वरित, सरल एवं नि:शुल्क निष्पादन करना था।
स्पेशल लोक अदालत के लिए एक बेंच का गठन किया गया था। इस बेंच में न्यायिक पदाधिकारी श्वेताभ सैंडिल्या तथा गैर-न्यायिक सदस्य गणपत चौधरी ने मामलों की सुनवाई की। दोनों सदस्यों ने पक्षकारों को आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने के लिए प्रेरित किया। इस विशेष लोक अदालत में एन.आई. एक्ट की धारा 138 से संबंधित कुल 94 मामलों को चिन्हित किया गया था। इनमें से पक्षकारों के बीच सहमति बनने पर एक मामले का सफलतापूर्वक निष्पादन किया गया। इस मामले में दोनों पक्षों के बीच 30,000 रुपये की समझौता राशि पर सहमति बनी, जिसके बाद मामले का विधिक रूप से निस्तारण कर दिया गया।
लोक अदालत के दौरान न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं तथा पक्षकारों की सक्रिय भागीदारी रही। अधिकारियों ने बताया कि लोक अदालत का उद्देश्य न्यायालयों में लंबित मामलों का शीघ्र एवं सौहार्दपूर्ण समाधान करना है। विशेष रूप से चेक बाउंस जैसे मामलों में आपसी समझौते से विवाद समाप्त होने पर समय, धन और अनावश्यक मुकदमेबाजी से राहत मिलती है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि लोक अदालत की पूरी प्रक्रिया सरल, नि:शुल्क और जनहितकारी होती है। इसमें किसी भी पक्ष पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ता और दोनों पक्षों की सहमति से विवाद का स्थायी समाधान निकलता है। इससे न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या कम करने में भी मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य आम लोगों को सुलभ, त्वरित और प्रभावी न्याय उपलब्ध कराना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर स्पेशल लोक अदालतों का आयोजन किया जाता है, ताकि समझौता योग्य मामलों का निस्तारण शीघ्र हो सके।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सुपौल ने आम नागरिकों से अपील की है कि जिन मामलों का समाधान आपसी सहमति से संभव है, वे लोक अदालत का लाभ उठाएं। इससे न केवल विवाद का त्वरित समाधान होता है, बल्कि पक्षकारों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध भी बने रहते हैं और न्याय व्यवस्था पर लंबित मामलों का भार भी कम होता है।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र