डायट किलाघाट में शोध प्रस्तावों को मिली मंजूरी, शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार पर जोर
दरभंगा, 28 अक्टूबर (हि.स.)। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), किलाघाट में मंगलवार को प्राचार्य डॉ. श्वेता सोनाली की अध्यक्षता में जिला स्तरीय शोध सलाहकार समिति की बैठक हुई। इसमें संस्थान के व्याख्याताओं की ओर से प्रस्तुत तीन सामान्य शोध-प्रस्तावों सहित विभिन्न क्रियात्मक अनुसंधान प्रस्तावों की समीक्षा की गई। आवश्यक सुझावों एवं मार्गदर्शन के साथ सभी प्रस्तावों को अनुमोदित किया गया।
बैठक में शोध की गुणवत्ता बढ़ाने, शिक्षक-प्रशिक्षण को प्रभावी बनाने तथा कक्षा-कक्ष में सामने आने वाली शैक्षिक समस्याओं के व्यावहारिक समाधान तलाशने पर जोर दिया गया। समिति ने शोध के उद्देश्यों, विषयों की प्रासंगिकता, शोध-पद्धति और प्रस्तावित कार्ययोजना की समीक्षा करते हुए शोधकर्ताओं को आवश्यक सुझाव दिए।
तीन सामान्य शोध-प्रस्तावों में मध्य स्तर के विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों पर अवधारणा-संबंध एवं पुनःस्मरण अभ्यास रणनीति के प्रभाव, प्राथमिक विद्यालयों में मूल्य शिक्षा के प्रति शिक्षकों की जागरूकता एवं व्यवहार तथा दृष्टिबाधित और अल्पदृष्टि वाले व्यक्तियों के लिए डायट में उपलब्ध भौतिक एवं शैक्षणिक सुविधाओं की सुलभता से जुड़े विषय शामिल हैं। इन प्रस्तावों को क्रमशः डॉ. श्वेता सोनाली एवं सत्यजीत रॉय, डॉ. प्रदीप कुमार प्रसाद तथा डॉ. अमृता श्री ने प्रस्तुत किया।
बैठक में क्रियात्मक अनुसंधान के विभिन्न प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। इनमें डीएलएड प्रशिक्षुओं के पुस्तकालय उपयोग, अंग्रेजी लेखन में व्याकरण संबंधी त्रुटियों के सुधार, मौखिक अभिव्यक्ति एवं नेतृत्व कौशल के विकास, कला समेकित अधिगम, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति जागरूकता, एफएलएन किट के माध्यम से संख्यात्मक दक्षता बढ़ाने तथा प्राथमिक शिक्षकों की शैक्षिक दक्षताओं में सुधार जैसे विषय शामिल रहे।
समिति ने कहा कि क्रियात्मक अनुसंधान के माध्यम से शिक्षण-प्रशिक्षण के दौरान सामने आने वाली समस्याओं की पहचान कर उनके व्यावहारिक समाधान विकसित किए जा सकते हैं। शोध के निष्कर्षों को शिक्षण प्रक्रिया में लागू करने से विद्यार्थियों के सीखने के स्तर और शैक्षणिक व्यवस्था की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है।
बैठक के समापन पर प्राचार्य डॉ. श्वेता सोनाली ने समिति के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने शोध कार्यों को संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता, शिक्षक-प्रशिक्षण और शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। साथ ही, शोधकर्ताओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य पूरा करने की सलाह दी।
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हिन्दुस्थान समाचार / Krishna Mohan Mishra