महाकाल मंदिर में मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना, दर्शन को उमड़े श्रद्धालु
किशनगंज, 16 अक्टूबर (हि.स.)। शारदीय नवरात्र के छठे दिन शुक्रवार को शहर के रुईधासा स्थित महाकाल मंदिर में मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। पुरोहित गुरु साकेत के सानिध्य में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। मां के दर्शन और पूजन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। पूजा-अर्चना और भक्तिमय माहौल से मंदिर परिसर दिनभर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। नवरात्र के पहले दिन से ही महाकाल मंदिर में मां दुर्गा की आराधना की जा रही है। यहां मां दुर्गा के साथ महाकाल बाबा की भी नियमित पूजा-अर्चना होती है। संध्या के समय आयोजित आरती में श्रद्धालु भक्तिभाव से शामिल होकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। नवरात्र को लेकर मंदिर में श्रद्धालुओं का उत्साह बना हुआ है। पुरोहित गुरु साकेत ने बताया कि नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से मां की आराधना करने से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। मां कात्यायनी को शहद अर्पित करने की परंपरा भी प्रचलित है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसी कारण उनका नाम कात्यायनी पड़ा। धार्मिक कथाओं में मां कात्यायनी को महिषासुर का वध करने वाली शक्ति स्वरूपा देवी के रूप में वर्णित किया गया है।
उनका वाहन सिंह है। देवी के हाथों में तलवार और कमल का फूल सुशोभित होते हैं, जबकि अन्य हाथ वरमुद्रा और अभयमुद्रा में दर्शाए जाते हैं। मां कात्यायनी को साहस, आत्मविश्वास और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की शक्ति का प्रतीक माना जाता है। उनकी आराधना भक्तों को जीवन की कठिनाइयों का सामना करने और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। नवरात्र के इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने माता से परिवार की सुख-समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।
हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह