'भरत मिलाप' पर उमड़ा श्रद्धा का जनसैलाब, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा इलाका

 


भागलपुर, 24 अक्टूबर (हि.स.)। जिले के नाथनगर में आस्था, भक्ति और आपसी भाईचारे का एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। अवसर था रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित भव्य 'भरत मिलाप' कार्यक्रम का, जहां प्रभु श्रीराम और उनके छोटे भाई भरत के ऐतिहासिक एवं भावुक मिलन की परंपरा को पूरे श्रद्धाभाव और उत्साह के साथ निभाया गया।

कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने प्रभु श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और संकटमोचन हनुमान जी का जीवंत प्रतीकात्मक स्वरूप धारण किया। इसके बाद इन दिव्य स्वरूपों की पूरे क्षेत्र में भव्य शोभायात्रा निकाली गई।

क्षेत्र भ्रमण के दौरान जगह-जगह पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रभु के दर्शन किए, आरती उतारी और पुष्प वर्षा की। 'जय श्रीराम' के गगनभेदी जयकारों से पूरा वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा।

शोभायात्रा के भ्रमण के बाद प्रसिद्ध मनोकामनानाथ चौक पर भरत मिलाप का मुख्य आयोजन हुआ। इस ऐतिहासिक और धार्मिक प्रसंग को अपनी आंखों से देखने के लिए हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

जैसे ही मंच पर प्रभु श्रीराम और भाई भरत के गले मिलने का दृश्य प्रस्तुत किया गया, वहां उपस्थित तमाम श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और कई आंखें नम हो गईं। चारों तरफ आस्था, उत्साह और अटूट भक्ति का माहौल दिखाई दिया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भरत मिलाप का यह पर्व भगवान श्रीराम के 14 वर्षों का कठिन वनवास पूरा कर अयोध्या लौटने और अपने छोटे भाई भरत से पुनर्मिलन की पावन स्मृति में मनाया जाता है। यह प्रसंग केवल दो भाइयों के मिलन की कहानी मात्र नहीं है, बल्कि यह समाज को त्याग, निश्छल प्रेम, उच्च मर्यादा और अटूट पारिवारिक एकता का जीवंत संदेश देता है।

नाथनगर में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम ने एक बार फिर समाज को भाईचारे, आपसी प्रेम और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश दिया। रामलीला कमेटी की यह वर्षों पुरानी परंपरा न केवल धार्मिक आस्था को जीवंत रख रही है, बल्कि नई पीढ़ी को हमारी समृद्ध भारतीय संस्कृति और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के महान आदर्शों से जोड़ने का भी सराहनीय काम कर रही है। कुल मिलाकर, नाथनगर का यह आयोजन प्रेम, त्याग और रिश्तों की मर्यादा का एक ऐसा अनुपम संगम बना, जिसके साक्षी हजारों लोग बने।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर