मलबे में तब्दील हुआ 1992 में निर्मित दीपप्रभा सिनेमा हॉल
भागलपुर, 01 जुलाई (हि.स.)। शहर की सांस्कृतिक पहचान रहे दीपप्रभा सिनेमा हॉल का अस्तित्व अब इतिहास के पन्नों में सिमटता जा रहा है। कभी हजारों दर्शकों की तालियों, सीटियों और सिनेमाई उत्साह का गवाह रहा यह प्रतिष्ठित सिनेमा हॉल आज मलबे में तब्दील हो चुका है। इसके साथ ही भागलपुर के एक पूरे दौर की यादें भी जैसे ढह गई हैं।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान् सेनानी अंग के लाल बाबू दीपनारायण सिंह और उनकी सुपुत्री प्रभावती देवी की स्मृति में प्रभावती देवी की सुपुत्री इन्दु देवी के पति, यानी प्रभाजी के दामाद जवाहर प्रसाद जायसवाल द्वारा वर्ष 1992 में निर्मित भागलपुर की पहचान रहा दीपप्रभा सिनेमा हॉल का ढांचा अब इतिहास बनता जा रहा है।
वर्षों तक हजारों लोगों की यादों का हिस्सा रहा यह प्रतिष्ठित सिनेमा हॉल अब मलबे में तब्दील हो चुका है। बताया जाता है कि आरंभिक दौर में जब इसका निर्माण हो रहा था। तब इसके मालिक जवाहर बाबू और मैं काफी देर तक वहाँ बैठकर इसके निर्माण और हॉल संबंधी भावी योजनाओं पर घंटों अंतरंग बातचीत किया करते थे। बाद में इसे बेचकर वे कोलकाता जा बसे।
वर्ष 1992 में स्वतंत्रता सेनानी बाबू दीपनारायण सिंह और उनकी सुपुत्री श्रीमती प्रभावती देवी की स्मृति में उनके दामाद जवाहर प्रसाद जायसवाल ने इस सिनेमा हॉल का निर्माण कराया था। यह सिर्फ़ एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं, बल्कि शहर को दिया गया एक सांस्कृतिक उपहार था। समय के साथ उन्होंने दीपप्रभा को बेच दिया और कोलकाता जाकर बस गए। दीपप्रभा में प्रदर्शित पहली फिल्म थी 'आई मिलन की रात'। गुलशन कुमार द्वारा निर्मित 1991 की हिंदी फिल्म आई मिलन की रात में अविनाश वाधवन और शाहीन मुख्य कलाकार थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर