सीवान के निजी अस्पतालों पर बड़ी कार्रवाई शुरू, नियम तोड़ने वालों पर गिरेगी गाज

 


सीवान, 17 मार्च (हि.स.)। जिले के शहरी व प्रखंड क्षेत्रों में संचालित निजी हॉस्पिटल, नर्सिंग होम और जांच घरों पर मंगलवार से बड़े पैमाने पर छापेमारी अभियान शुरू हो गया है।

जिला प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से स्वास्थ्य सेवाओं के निजी क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। प्रशासन को विभिन्न स्रोतों से मिली शिकायतों के आधार पर यह पाया गया कि कई निजी स्वास्थ्य संस्थान विभागीय दिशा-निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं और मरीजों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ किया जा रहा है।

इसी के मद्देनजर जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ ओपी लाल,जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अरविंद कुमार एवं सीडीओ डॉ अशोक कुमार के नेतृत्व में तीन संयुक्त टीमों का गठन कर जांच शुरू कर दी गई है। सीडीओ डॉ अशोक कुमार के नेतृत्व में जांच टीम ने लगभग एक दर्जन नर्सिंग होम एवं जांच घरों की जांच की।

जांच के दौरान कुछ ने कागज दिखाया तथा कुछ ने जांच टीम से समय मांगा.जांच के दौरान सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि कई संस्थान क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स अधिनियम, 2010 की धारा 11, 37 और 38 का उल्लंघन कर रहे हैं। बिहार क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स नियमावली, 2013 तथा केंद्र सरकार के 2012 और 2018 के संशोधित नियमों के तहत निर्धारित न्यूनतम मानकों,जैसे प्रशिक्षित स्टाफ, जरूरी उपकरण और बुनियादी सुविधाएं का भी पालन नहीं किया जा रहा है।

जांच में अयोग्य कर्मियों द्वारा इलाज, जीवन रक्षक उपकरणों की कमी, बायो-मेडिकल कचरा प्रबंधन में लापरवाही और अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी जैसी खतरनाक अनियमितताएं चिन्हित की गई हैं, जो सीधे तौर पर मरीजों की जान को जोखिम में डालती हैं।

यह पूरी कार्रवाई क्रिमिनल मिस. नंबर-10651/2025 (थाना बसंतपुर केस संख्या-626/2024) में पटना हाईकोर्ट द्वारा 13 मई 2025 को दिए गए आदेश के अनुपालन में की जा रही है। न्यायालय ने जिले के सभी निजी स्वास्थ्य संस्थानों की सघन जांच के स्पष्ट निर्देश दिए थे।

जिलाधिकारी द्वारा तीन सदस्यीय टीमों का गठन किया गया है, जिन्हें 13 मार्च से एक सप्ताह के भीतर चिन्हित क्षेत्रों में गहन जांच कर साक्ष्य सहित रिपोर्ट सौंपनी है। सिविल सर्जन को पूरे अभियान की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले संस्थानों पर सीलिंग, जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जबकि नियमों का पालन करने वाले संस्थानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।यह कार्रवाई आम लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जा रही है, लेकिन सवाल यह भी उठता है कि आखिर इतने दिनों तक ये अनियमितताएं बिना रोक-टोक कैसे चलती रहीं।

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हिन्दुस्थान समाचार / Amar Nath Sharma