1 करोड़ की लागत से बनी सड़क 2 महीने में ही उखड़ी, नाले में सुराख न होने से जलजमाव
भागलपुर, 28 जुलाई (हि.स.)। बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड के दावों और कार्यशैली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्यमंत्री समग्र शहरी विकास योजना के तहत भागलपुर नगर निगम क्षेत्र में हुआ करोड़ों का निर्माण कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि निर्माण में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती गई है, जिसके कारण पहली ही बरसात ने विभाग के विकास कार्यों की पोल खोलकर रख दी है। स्थानीय लोगों रवि कुमार, संजय कुमार, प्रकाश शर्मा, बबलू शर्मा, महेश शर्मा आदि के मुताबिक, नगर निगम भागलपुर क्षेत्र के त्रिमूर्ति चौक (गुमटी नंबर 02, भीखनपुर) से लेकर रेलवे ढाला (गुमटी नंबर 12) तक सड़क और नाले का निर्माण करीब 25 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद कराया गया था। वित्तीय वर्ष 2024-25 के तहत इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए 1,03,18,319 रुपये (एक करोड़ तीन लाख अट्ठारह हजार तीन सौ उन्नीस रुपये) की भारी-भरकम राशि का एकरारनामा (एग्रीमेंट) हुआ था।
जनता को उम्मीद थी कि अब उन्हें जलजमाव और जर्जर रास्तों से मुक्ति मिलेगी, लेकिन निर्माण के महज दो महीने के भीतर ही सड़क की गिट्टियां उखड़ने लगी हैं। घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल के कारण सड़क की ऊपरी परत पूरी तरह बर्बाद हो रहा है। इस योजना का सबसे हैरान करने वाला पहलू इसका अजीबोगरीब इंजीनियरिंग डिजाइन है। सड़क किनारे पानी की निकासी के लिए नाला तो बनाया गया और उसके ऊपर भारी-भरकम कल्वर्ट (पुलिया/कवर) भी डाल दिए गए। लेकिन, इंजीनियर और संवेदक कल्वर्ट में पानी जाने के लिए सुराख छोड़ना ही भूल गए। नतीजा यह है कि बारिश का पानी नाले में जाने के बजाय पूरी तरह सड़क पर ही जमा हो रहा है।
इंजीनियरिंग की इस भारी लापरवाही का खामियाजा क्षेत्र की एक बड़ी आबादी भुगत रही है। कल्वर्ट में सुराख न होने के कारण मामूली बारिश में भी सड़कों पर घुटनों तक पानी भर जाता है। इसके चलते बुनियादी स्कूल गली में भीषण जलजमाव हो जाता है। शिवाला गली के घरों में नाले और बारिश का गंदा पानी घुस रहा है। 12 नंबर गुमटी के इर्द-गिर्द का पूरा इलाका तालाब में तब्दील हो जाता है। 25 साल बाद बनी सड़क की यह दुर्दशा देखकर स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। मोहल्ले वासियों ने निर्माण की गुणवत्ता पर सीधे तौर पर सवाल उठाए हैं।
लोगों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों और संवेदक की मिलीभगत के कारण सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया है। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री कार्यालय से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषी अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर