बक्सर ताप विद्युत परियोजना की दूसरी इकाई ने हासिल किया वाणिज्यिक प्रचालन
बक्सर, 12 सितंबर (हि.स.)। बक्सर जिले के चौसा में स्थापित 1320 मेगावाट क्षमता वाली बक्सर ताप विद्युत परियोजना ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। परियोजना की 660 मेगावाट क्षमता वाली इकाई-2 ने 12 सितंबर 2026 को सफलतापूर्वक वाणिज्यिक प्रचालन शुरू कर दिया। इसके साथ ही परियोजना की दोनों इकाइयां व्यावसायिक रूप से संचालित हो गई हैं और पूरी 1320 मेगावाट क्षमता विद्युत उत्पादन के लिए उपलब्ध हो गई है।
एसजेवीएन के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भूपेंद्र गुप्ता ने इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार, विद्युत मंत्रालय तथा अन्य संबंधित मंत्रालयों और विभागों के प्रति मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
उन्होंने परियोजना से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों की प्रतिबद्धता और योगदान की भी सराहना की। इकाई-2 के वाणिज्यिक प्रचालन के साथ बक्सर ताप विद्युत परियोजना एसजेवीएन की पहली ताप विद्युत परियोजना बन गई है, जिसकी दोनों इकाइयां अब व्यावसायिक रूप से संचालित हैं।
इस अवसर पर निदेशक (कार्मिक) अजय कुमार शर्मा, निदेशक (वित्त) पार्थजीत डे तथा निदेशक (परियोजनाएं) राजेश कुमार चंदेल ने भी कर्मचारियों एवं संबंधित हितधारकों को बधाई दी।
13,756 करोड़ रुपये की परियोजना
बक्सर के चौसा में स्थित 2 गुना 660 मेगावाट क्षमता की बक्सर ताप विद्युत परियोजना का निर्माण एसजेवीएन की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी एसजेवीएन थर्मल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया गया है। परियोजना की पहली 660 मेगावाट इकाई का वर्चुअल उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 अगस्त 2025 को किया था और इकाई-1 ने 14 नवंबर 2025 को वाणिज्यिक प्रचालन हासिल किया था।
परियोजना को 13,756.56 करोड़ रुपये के कुल निवेश से विकसित किया गया है। इसमें 85 प्रतिशत संयंत्र भार गुणक पर प्रतिवर्ष करीब 9,828.72 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन की संभावना है। परियोजना से उत्पादित कुल विद्युत का 85 प्रतिशत बिहार को दीर्घकालिक विद्युत क्रय करार के तहत आवंटित किया गया है। इससे बिहार के साथ-साथ पूर्वी क्षेत्र में विद्युत उपलब्धता बढ़ाने और अधिक मांग के समय बिजली की कमी को कम करने में मदद मिलेगी।
आधुनिक तकनीक से लैस
बक्सर ताप विद्युत परियोजना अत्याधुनिक सुपरक्रिटिकल प्रौद्योगिकी पर आधारित है। इसमें उन्नत उत्सर्जन नियंत्रण प्रणालियां लगाई गई हैं, जिससे बेहतर परिचालन क्षमता के साथ पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी।
परियोजना के निर्माण के विभिन्न चरणों में करीब 65 हजार श्रमिकों को रोजगार मिला। इसके अलावा स्थानीय समुदायों के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार तथा आर्थिक अवसरों का भी सृजन हुआ है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल पर भी जोर
एसजेवीएन ने परियोजना क्षेत्र और आसपास के इलाकों में सामुदायिक विकास के लिए भी कई पहल की हैं। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता, महिला सशक्तीकरण तथा सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़ी गतिविधियों को प्राथमिकता दी गई है।
एसजेवीएन के अनुसार, इकाई-2 का सफल वाणिज्यिक प्रचालन केवल देश की विद्युत उत्पादन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय विकास, रोजगार सृजन और समावेशी सामाजिक-आर्थिक प्रगति के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / Jitendra Kumar Mishra