सीबीएसई की नई तीन-भाषा नीति से बढ़ेगी विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता : डॉ. शरद चौधरी

 


सीवान, 28 मई (हि.स.)। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की नई तीन-भाषा नीति को शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक और दूरदर्शी पहल माना जा रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति विद्यार्थियों के समग्र विकास के साथ-साथ उन्हें भाषाई, सांस्कृतिक और बौद्धिक रूप से अधिक सक्षम बनाएगी।

विद्या भारती बिहार के कार्यकारिणी सदस्य एवं महावीरी सरस्वती विद्या मंदिर, विजयहाता, सिवान के अध्यक्ष डॉ. शरद चौधरी ने कहा कि नई नीति का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में बहुभाषिक क्षमता विकसित करना, मातृभाषा एवं भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान बढ़ाना तथा उन्हें राष्ट्रीय और वैश्विक अवसरों के लिए तैयार करना है।

उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य होगा, जिनमें कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं शामिल रहेंगी। इससे बच्चों में भारतीय संस्कृति, परंपरा और विविधता के प्रति समझ और सम्मान बढ़ेगा।

डॉ. चौधरी ने स्पष्ट किया कि तीसरी भाषा के लिए कक्षा 10 में अलग से बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं होगी। इसका मूल्यांकन विद्यालय स्तर पर आंतरिक रूप से किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों पर अतिरिक्त परीक्षा का दबाव नहीं पड़ेगा और वे सहज रूप से नई भाषाएं सीख सकेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि इस नीति के तहत किसी विशेष भाषा को थोपने का प्रयास नहीं किया जा रहा है। सीबीएसई पहले से ही 45 से अधिक भाषाओं का विकल्प उपलब्ध करा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को अपनी रुचि और आवश्यकता के अनुसार भाषा चुनने की स्वतंत्रता मिलेगी।

अभिभावकों एवं शिक्षकों से अपील करते हुए डॉ. शरद चौधरी ने कहा कि वे बच्चों को विभिन्न भाषाएं सीखने के लिए प्रेरित करें, क्योंकि “अधिक भाषाएं, अधिक समझ और बेहतर भविष्य” की दिशा में यह नीति एक मजबूत आधार साबित होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / Amar Nath Sharma