महात्मा गांधी को आजादी का पूरा श्रेय देना हजारों क्रांतिकारियों का अपमान है : ब्रजभूषण शरण सिंह
भागलपुर, 23 अप्रैल (हि.स.)। भागलपुर में आयोजित बाबू वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव समारोह में शामिल होने पहुंचे पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने आजादी की लड़ाई और भारतीय संविधान को लेकर बड़ा बयान दिया है। जिससे नई बहस छिड़ गई है। उन्होंने साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल गीत का जिक्र करते हुए कहा कि सिर्फ महात्मा गांधी को आजादी का पूरा श्रेय देना उन हजारों क्रांतिकारियों का अपमान है, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी।
उन्होंने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, बाबू वीर कुंवर सिंह, बिरसा मुंडा और देवी बख्श सिंह जैसे योद्धाओं को याद करते हुए कहा कि इन वीरों को इतिहास में उचित स्थान नहीं मिला। बृजभूषण शरण सिंह ने रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियां जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज ने क्रांतिकारियों के योगदान पर मौन रहकर गलती की। संविधान निर्माण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि संविधान केवल बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने नहीं बनाया बल्कि संविधान सभा के 242 अन्य विद्वान सदस्यों का भी योगदान था।
उन्होंने विशेष रूप से बिहार के सदस्यों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इतिहास को संतुलित नजरिए से देखने की जरूरत है। इसके पूर्व, पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह का शहर पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। बाबू वीर कुंवर सिंह सामाजिक परिषद के अध्यक्ष डॉ. संजय सिंह, उपाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष रणजीत सिंह और कार्यक्रम प्रभारी डॉ. राजीव सिंह ने दोनों अतिथियों का स्वागत किया।
इसके बाद जीरो माइल चौक स्थित बाबू वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा पर बृजभूषण शरण सिंह और धनंजय सिंह ने माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके शौर्य और बलिदान को नमन किया। माल्यार्पण के बाद दोनों नेता टाउन हॉल पहुंचे जहां आयोजित सभा को संबोधित किया। इस दौरान दोनों मुख्य अतिथियों ने बाबू वीर कुंवर सिंह की जीवनी पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बाबू वीर कुंवर सिंह 1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक थे। जिन्होंने 80 वर्ष की उम्र में भी अंग्रेजों के खिलाफ तलवार उठाई थी। वे बिहार के शाहाबाद क्षेत्र के जगदीशपुर के राजा थे और अपने साहस, रणनीति और अदम्य वीरता के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर