अब बहानेबाजी खत्म, दाखिल-खारिज मामलों में बिहार सरकार की सख्त पहल
- भूमि मामलों में बड़ा सुधार, लंबित और सक्षम न्यायालय की नई गाइडलाइन जारी
- खरीदारों को राहत, बिना स्टे ऑर्डर के नहीं रुकेगा दाखिल-खारिज
पटना, 03 अप्रैल (हि.स.)। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने दाखिल-खारिज मामलों में हो रही अनावश्यक देरी पर लगाम लगाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। उप मुख्यमंत्री व राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि अब दाखिल-खारिज में बहानेबाजी नहीं चलेगी। मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जाएगा।
उप मुख्यमंत्री ने दाखिल-खारिज मामलों में तेजी लाने के लिए नए दिशा-निर्देश दिए हैं। अब बिना किसी स्टे ऑर्डर के मामलों को लंबित नहीं रखा जा सकेगा, जिससे वास्तविक खरीदारों को राहत मिलने की उम्मीद है।
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री ने बताया कि बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 की धारा 6(12) में प्रयुक्त सक्षम न्यायालय और लंबित शब्दों की अलग-अलग व्याख्या के कारण कई अंचलों में अनावश्यक विलंब हो रहा था। इस समस्या को दूर करने के लिए विभाग ने विस्तृत समीक्षा के बाद सभी राजस्व अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
नए निर्देशों के अनुसार सक्षम न्यायालय में सिविल कोर्ट, पटना उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय के साथ-साथ डीसीएलआर, एडीएम, डीएम, कमिश्नर कोर्ट, विधि विभाग द्वारा अधिकृत न्यायालय और बिहार भूमि न्यायाधिकरण (बीएलटी) को शामिल किया गया है।
वहीं लंबित मामलों की परिभाषा भी स्पष्ट कर दी गई है। अब वही वाद लंबित माना जाएगा, जो विधिवत दायर होकर न्यायालय में प्रक्रियाधीन हो और जिसमें न्यायालय द्वारा संज्ञान लिया गया हो। केवल आवेदन, आपत्ति या अभ्यावेदन दाखिल होने को लंबित नहीं माना जाएगा।
इसके अलावा, यदि किसी सक्षम न्यायालय द्वारा कोई स्थगनादेश (स्टे ऑर्डर) प्रभावी नहीं है तो राजस्व अधिकारी नियमानुसार कार्रवाई जारी रखेंगे और मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखेंगे। यदि दायर वाद की प्रमाणित प्रति में स्पष्ट रूप से ‘स्वीकृति’ अंकित नहीं है तो उसे भी लंबित नहीं माना जाएगा।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि वास्तविक खरीदारों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जाए और भूमि से जुड़े मामलों का समयबद्ध निपटारा हो। उन्होंने सभी अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि नए दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और त्वरित सेवा सुनिश्चित करें।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ .राजेश