बिहार में पिछड़ा-अति पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए नई योजनाओं की घोषणा, टीआरआई-4 से 478 शिक्षकों की होगी नियुक्ति
पटना, 08 जुलाई (हि.स.)। बिहार सरकार के पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की मंत्री रमा निषाद ने बुधवार को विभाग की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, शिक्षक नियुक्ति, छात्रवृत्ति और छात्र कल्याण से जुड़ी नई पहलों की जानकारी दी। पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पिछड़ा एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए कई नई योजनाएं शुरू करने जा रही है।
मंत्री ने बताया कि टीआरई-4 के तहत विभाग द्वारा संचालित अन्य पिछड़ा वर्ग कन्या आवासीय प्लस-टू उच्च विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए कुल 478 रिक्त पदों पर नियुक्ति की अधियाचना भेजी गई है। इनमें उच्च माध्यमिक शिक्षक (पीजीटी) के 230, माध्यमिक शिक्षक (टीजीटी) के 129, प्रारंभिक शिक्षक (कक्षा छठी से आठवीं) के 103 तथा प्रधानाध्यापक के 16 पद शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि विभाग जल्द ही 'मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग अभ्युदय योजना' शुरू करेगा। इस योजना के तहत मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रतिष्ठित संस्थानों के माध्यम से जेईई, नीट, क्लैट, निफ्ट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक विद्यार्थियों को भी वित्तीय अनुदान देने का प्रावधान किया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि सरकार अनुमंडल स्तर पर छात्राओं के लिए 520 सीट क्षमता वाले तथा जिला एवं अनुमंडल स्तर पर छात्रों के लिए 720 सीट क्षमता वाले नए आवासीय विद्यालयों के निर्माण की दिशा में कार्य कर रही है। साथ ही छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों को 50 हजार रुपये तक की लागत वाला लैपटॉप उपलब्ध कराने की योजना पर भी काम चल रहा है।
रमा निषाद ने कहा कि मुख्यमंत्री अत्यंत पिछड़ा वर्ग सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के तहत बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अत्यंत पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए क्रमशः 50 हजार और एक लाख रुपये की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खातों में दी जाती है।
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 से इस योजना का दायरा बढ़ा दिया गया है। अब यूपीएससी की भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय वन सेवा (आईएफएस), केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ), संयुक्त रक्षा सेवा (सीडीएस), राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए/एनए), अन्य राज्यों की सिविल सेवा परीक्षाएं, बिहार न्यायिक सेवा परीक्षा, आरबीआई ग्रेड-बी, एसबीआई एवं आईबीपीएस प्रोबेशनरी ऑफिसर, एलआईसी सहायक प्रशासनिक अधिकारी (एएओ), कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) तथा रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) की विभिन्न प्रारंभिक परीक्षाओं को भी इसमें शामिल किया गया है। इन परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को 30 हजार से एक लाख रुपये तक की एकमुश्त सहायता प्रदान की जा रही है।
मंत्री ने बताया कि इस योजना के तहत अब तक 9,224 अभ्यर्थियों को लाभ मिल चुका है। हाल ही में घोषित 70वीं बीपीएससी परीक्षा के अंतिम परिणाम में योजना के 2,095 लाभार्थियों में से 101 अभ्यर्थियों ने अंतिम चयन प्राप्त कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
उन्होंने कहा कि राज्य के सरकारी एवं मान्यता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा पहली से दसवीं तक अध्ययनरत पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए छात्रवृत्ति योजना का संचालन शिक्षा विभाग के माध्यम से किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 से राज्य सरकार ने छात्रवृत्ति की वार्षिक राशि को दोगुना कर दिया है।
मंत्री ने बताया कि मैट्रिक के बाद 11वीं, उच्च शिक्षा, डिप्लोमा, स्नातक, मेडिकल, इंजीनियरिंग, प्रबंधन तथा अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत पिछड़ा एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए भी छात्रवृत्ति योजना संचालित की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 5,37,726 छात्र-छात्राओं को इस योजना का लाभ मिल चुका है।
पत्रकार वार्ता में विभाग के अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल कुमार भी मौजूद रहे।-------------
हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी