गंडक नदी में बाढ़ की भयावहता को नासा के उपग्रह आंकड़ों ने भी किया दर्ज : विजय चौधरी

 

-देवघाट में 27 सितंबर को 11.94 मीटर पहुंचा जलस्तर, कई स्थानों पर नए रिकॉर्ड

पटना, 03 अक्टूबर (हि.स.)। बिहार में हाल में आई भीषण बाढ़ की स्थिति को लेकर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने शनिवार को कहा कि गंडक नदी के जलस्तर में हुई अभूतपूर्व वृद्धि और उससे पैदा हुई बाढ़ की गंभीरता को अब वैज्ञानिक उपग्रह आंकड़ों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि नासा अर्थ ऑब्जर्वेटरी ने 2 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट “रैन्स स्वाम्प द गंडक रिवर” में नेपाल और भारत में गंडक नदी के रिकॉर्ड जलस्तर तथा उसके कारण बड़े भूभाग में फैले बाढ़ के पानी का विस्तृत उल्लेख किया है।

विजय कुमार चौधरी ने बताया कि नासा की रिपोर्ट के अनुसार, 24 से 27 सितंबर के बीच नेपाल के पर्वतीय लुंबिनी और गंडकी प्रांतों में अत्यधिक बारिश हुई। भारी वर्षा के कारण कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं हुईं। इसके बाद गंडक नदी, जिसे नेपाल में नारायणी के नाम से जाना जाता है, नेपाल और भारत के कई हिस्सों में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। बढ़े जलप्रवाह के कारण नदी से जुड़े इलाकों में बाढ़ का दायरा तेजी से बढ़ा तथा कई स्थानों पर तटबंधों के ऊपर से पानी बहने और उनके टूटने की घटनाएं सामने आईं।

उपमुख्यमंत्री चौधरी ने कहा कि नासा के सैटेलाइट से 20 सितंबर और 29 सितंबर 2026 को प्राप्त तस्वीरों के तुलनात्मक अध्ययन से बाढ़ के विस्तार का स्पष्ट वैज्ञानिक प्रमाण मिलता है। दोनों तस्वीरों में नदी के आसपास के क्षेत्रों और दूर तक फैले जलमग्न इलाकों में बड़ा अंतर दिखाई देता है। इससे बाढ़ के तेजी से विस्तारित होने का आकलन किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि रिपोर्ट में नेपाल के देवघाट में 27 सितंबर को गंडक नदी का जलस्तर 11.94 मीटर तक पहुंचने का उल्लेख है। यह 1960 के दशक में वहां जलस्तर की माप शुरू होने के बाद दर्ज किया गया सबसे ऊंचा स्तर बताया गया है। इसी तरह भारत में गंडक नदी के किनारे स्थित बगहा, डुमरियाघाट, रेवा घाट और लालगंज जैसे स्थानों पर भी नए उच्चतम जलस्तर दर्ज किए जाने का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है।

विजय चौधरी ने कहा कि नासा की रिपोर्ट से यह संकेत मिलता है कि इस बार गंडक में आई बाढ़ सामान्य मौसमी परिस्थितियों तक सीमित नहीं थी, बल्कि नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में हुई अत्यधिक बारिश से पैदा हुए असाधारण जलप्रवाह का नतीजा थी। लगातार भारी बारिश का सीधा असर बिहार में गंडक के जलस्तर पर पड़ा और पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सारण तथा मुजफ्फरपुर के कई इलाकों में जलभराव एवं बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। उपग्रह और वैज्ञानिक आंकड़ों से प्राप्त सूचनाएं बाढ़ की तीव्रता, विस्तार और प्रभावित क्षेत्रों का आकलन करने के साथ भविष्य की तैयारियों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती हैं।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि गंडक के जलस्तर में इस असाधारण वृद्धि और उसके व्यापक प्रभाव को वैज्ञानिक आंकड़ों से मिले प्रमाण बाढ़ की गंभीरता को समझने में महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं।-----------

हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी