बिहार विधान परिषद चुनाव: एलजीपी-आर ने अशरफ अंसारी को बनाया उम्मीदवार
पटना, 06 जून (हि.स.)। बिहार विधान परिषद की नौ सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने अपने सभी उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप दे दिया है। शनिवार को केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने भी अपने हिस्से की सीट के लिए उम्मीदवार की घोषणा कर दी। पार्टी ने अपने कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष अशरफ अंसारी को विधान परिषद चुनाव के लिए मैदान में उतारा है।
लोजपा (रामविलास) के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल खालिक ने इसकी आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि पार्टी के केंद्रीय संसदीय बोर्ड ने अशरफ अंसारी के नाम को मंजूरी दी है। उनके नाम की घोषणा के साथ ही राजग के सभी नौ उम्मीदवारों की तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो गई है।
गौरतलब है कि बिहार विधान परिषद की इन सीटों के लिए मतदान 18 जून को होना है, जबकि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून निर्धारित की गई है। इसी चुनाव के साथ एक सीट पर उपचुनाव भी कराया जाएगा, जो पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी।
राजग ने इस चुनाव में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने का प्रयास किया है। उम्मीदवारों की सूची पर नजर डालें तो गठबंधन ने महिलाओं, पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति अपनाई है। नौ उम्मीदवारों में दो महिलाओं को भी मौका दिया गया है, जिससे महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने का संदेश देने की कोशिश की गई है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने कोटे से भोजपुरी फिल्म जगत के चर्चित अभिनेता और गायक पवन सिंह, वरिष्ठ नेता संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित को उम्मीदवार बनाया है। इनमें पवन सिंह की उम्मीदवारी सबसे अधिक चर्चा में है, क्योंकि वे पहली बार विधान परिषद चुनाव के जरिए सक्रिय राजनीति में नई भूमिका निभाने जा रहे हैं।
वहीं जनता दल (यूनाइटेड) ने अपने हिस्से की तीन सीटों के लिए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत, महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष भारती मेहता और पश्चिम चंपारण की शिवरानी देवी प्रजापति को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा, उपचुनाव के लिए जदयू ने शेखपुरा निवासी ललन प्रसाद को प्रत्याशी घोषित किया है।
अब उम्मीदवारों की घोषणा के बाद चुनावी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। सभी राजनीतिक दल अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए रणनीति बनाने में जुट गए हैं। ऐसे में 18 जून को होने वाला विधान परिषद चुनाव बिहार की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।------------
हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी