फरक्का जल संधि मुद्दे पर 30 सालों से हुआ बिहार के साथ अन्याय, अब कोई समझौता नहीं : चंदन कुमार सिंह
पटना, 06 सितंबर (हि.स.)। जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के प्रदेश प्रवक्ता चंदन कुमार सिंह ने रविवार काे जारी बयान में कहा कि साल 1996 में हस्ताक्षरित फरक्का जल संधि मुद्दे पर बिहार के साथ पिछले 30 सालों से अन्याय हुआ है लेकिन अब बिहार के हितों से कोई समझौता नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा एवं पार्टी प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा गंगा नदी से सटे राज्य के 12 जिलों का दौरा कर रहे हैं और इस संधि के चलते बिहार के लोगों को किस तरह नुकसान हो रहा है इसको लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस संधि के चलते बिहार के लोगों का हक छीनने का काम किया जा रहा है।
पश्चिम बंगाल में फरक्का बैराज के बनने से गंगा नदी में गाद जमा हो रही है, जिसके चलते गंगा नदी उथली हो रही है।
गंगा नदी के उथली होने से बिहार के कई इलाकों में कहीं बाढ़ तो कई इलाकों को सूखे का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आबादी बढ़ने के साथ साथ राज्य में पानी की जरूरतें भी बढ़ी हैं लेकिन इस संधि के चलते बिहार के लोगों को उसका वाजिब पानी नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक स्वार्थों के चलते बिहार के हितों की बलि चढ़ाने वाले तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने कभी इस संधि के खिलाफ आवाज नहीं उठाई और साल 1996 में इस संधि को होने दिया, जबकि 1996 में वो बिहार के मुख्यमंत्री थे और केंद्र की संयुक्त मोर्चे की सरकार में भी वो प्रभावशाली भूमिका में थे। तकलीन विदेश मंत्री आई के गुजराल से लालू प्रसाद यादव के अच्छे संबंध थे और अगर वो दबाव बनाते तो ये संधि नहीं हो पाती।
वहीं नीतीश कुमार ने फरक्का जल संधि के खिलाफ हमेशा आवाज उठाई और संधि का विरोध किया। उन्होंने संधि के चलते गंगा नदी में जमा हो रही गाद और उससे हो रही समस्याओं को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी मुलाकात कर फरक्का बैराज के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी और इसका हल निकालने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में इस मामले को जोर शोर से उठाया और इस संधि के नवीकरण के खिलाफ अपनी आवाज उठाई। पानी की कमी के चलते राज्य के कई इलाकों में भू जलस्तर नीचे जा रहा है ऐसे में बिहार के वाजिब मांगों और जरूरतों की अनदेखी की गई तो राज्य के लोगों को आने वाले समय में गंभीर पेयजल संकट, सिंचाई के लिए पानी की कमी की समस्या एवं उद्योगों को पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पाने की समस्या का सामना करना पड़ेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / चंदा कुमारी