बिहार में पटना–गया–डोभी एनएच बनेगा ‘ग्रीन कॉरिडोर’, फलदार पौधों से सजेगी 65 किमी लंबी हरित पट्टी

 


पटना, 17 मार्च (हि.स.)। बिहार में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी पहल शुरू होने जा रही है। पटना–गया–डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) को ‘ग्रीन कॉरिडोर’ के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की गई है।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत सड़क के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर फलदार और छायादार पौधों का रोपण किया जाएगा। योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2028-29 के बीच गया वन प्रमंडल क्षेत्र में लगभग 65 किलोमीटर लंबाई में 21 हजार से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। इसका उद्देश्य न केवल हरित आवरण बढ़ाना है, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि करना है।

योजना की खासियत यह है कि इसे जनभागीदारी के मॉडल पर लागू किया जाएगा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों-जैसे मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, पार्षद, जिला पार्षद, विधायक और जिलाधिकारी के सहयोग से इसे जमीन पर उतारा जाएगा। किसानों के साथ समन्वय स्थापित कर उनकी रैयती जमीन पर भी पौधारोपण कराया जाएगा, जिससे ‘कम्युनिटी फार्मिंग’ को बढ़ावा मिलेगा और उन्हें अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा।

विभागीय मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने मंगलवार को इस परियोजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को विस्तृत कार्ययोजना और मार्गदर्शिका तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने पौधों की गुणवत्ता, सही प्रजाति के चयन और वैज्ञानिक तरीके से रोपण पर विशेष ध्यान देने की बात कही। साथ ही किसानों को प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया गया, ताकि वे पौधों की देखभाल और उनसे होने वाले आर्थिक लाभ को समझ सकें।

किसानों को इस योजना के तहत प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। इसके अलावा अधिकारियों को नियमित स्थल निरीक्षण करने और प्रगति की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। हरियाली मिशन के निदेशक को इस परियोजना के समन्वय के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है।

इसी क्रम में 19 मार्च को एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें हरित आवरण बढ़ाने के क्षेत्र में कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा, ताकि योजना को और प्रभावी बनाया जा सके।

इस ग्रीन कॉरिडोर के तहत हर 5 किलोमीटर पर एक ही प्रकार के फलदार पौधे लगाए जाएंगे, जिससे एक समान हरित पट्टी विकसित हो सके। इसमें आम, अमरूद, जामुन, लीची, कटहल, आंवला, बेल, नींबू, सहजन के साथ-साथ नीम, बरगद, पीपल और पाकड़ जैसे पौधों को शामिल किया गया है।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से न केवल सड़क किनारे का वातावरण हराभरा और आकर्षक बनेगा, बल्कि फलों के उत्पादन से स्थानीय बाजार को भी बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।-----------

हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी