बिहार विधानसभा से बिहार जुआ प्रतिषेध विधेयक-2026 पारित, ऑनलाइन-डिजिटल जुए पर कसेगा शिकंजा

 

पटना, 21 जुलाई (हि.स.)। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को बिहार जुआ प्रतिषेध विधेयक-2026 ध्वनिमत से पारित हो गया। राज्य सरकार का कहना है कि बदलते तकनीकी परिवेश और ऑनलाइन जुए के बढ़ते चलन को देखते हुए यह नया कानून लाया गया है, जिससे पारंपरिक जुए के साथ-साथ डिजिटल और ऑनलाइन माध्यमों से संचालित अवैध जुआ गतिविधियों पर भी प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा।

विधेयक को सदन में प्रस्तुत करते हुए उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि राज्य में अब तक 1867 के बंगाल जुआ अधिनियम के प्रावधान लागू थे। उस समय जुए का स्वरूप मुख्य रूप से ताश, पासा और अन्य पारंपरिक खेलों तक सीमित था, लेकिन सूचना प्रौद्योगिकी के विस्तार और इंटरनेट आधारित प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने जुए के तौर-तरीकों में व्यापक बदलाव ला दिया है। आज मोबाइल एप, वेबसाइट और अन्य डिजिटल माध्यमों से बड़े पैमाने पर ऑनलाइन जुआ संचालित हो रहा है, जिसे पुराने कानून के तहत प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना संभव नहीं था।

उन्होंने कहा कि नया विधेयक केवल जुआ खेलने वाले व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि जुआ संचालित करने वाले, जुए के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वाले, तकनीकी या अन्य माध्यम से सहयोग देने वाले तथा जुए से कमीशन या आर्थिक लाभ प्राप्त करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को भी इसके दायरे में लाया गया है। ऐसे सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।

उपमुख्यमंत्री ने सदन से विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने की अपील करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य केवल कानून बनाना नहीं, बल्कि समाज को ऑनलाइन जुए जैसी बढ़ती सामाजिक बुराई से बचाना है। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों के जरिए संचालित जुए के कारण युवाओं और आम लोगों के आर्थिक शोषण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जिन्हें रोकने के लिए आधुनिक कानून की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाए। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक राहुल शर्मा ने कहा कि सरकार को इस विधेयक के कुछ प्रावधानों पर और विस्तार से विचार करना चाहिए, ताकि किसी प्रकार की व्यावहारिक कठिनाई उत्पन्न न हो।

इस पर जवाब देते हुए विजय कुमार चौधरी ने कहा कि जुआ संबंधी कानून बनाने का अधिकार राज्यों को प्राप्त है। उन्होंने बताया कि यह विषय पहले उच्चतम न्यायालय तक भी पहुंच चुका है, जहां स्पष्ट किया गया था कि इस विषय पर कानून बनाने का अधिकार राज्य सरकारों के पास है। इसी संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप बिहार सरकार ने वर्तमान परिस्थितियों और तकनीकी बदलावों को ध्यान में रखते हुए नया कानून तैयार किया है।

उपमुख्यमंत्री ने विपक्ष के इस आरोप को भी खारिज किया कि सरकार विधेयक को जल्दबाजी में लेकर आई है। उन्होंने कहा कि जिस कानून को अब बदला जा रहा है, वह करीब 159 वर्ष पुराना है। इतने लंबे समय में समाज, तकनीक और अपराध के स्वरूप में व्यापक बदलाव आया है, जबकि कानून लगभग उसी रूप में लागू रहा। ऐसे में आधुनिक परिस्थितियों के अनुरूप नया कानून लाना समय की आवश्यकता थी, न कि जल्दबाजी।

सदन में चर्चा पूरी होने के बाद बिहार जुआ प्रतिषेध विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। सरकार का मानना है कि इस कानून के लागू होने के बाद राज्य में ऑनलाइन और संगठित जुए के नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा इससे जुड़े आर्थिक अपराधों पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी।------------

हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी