मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 24 प्रस्तावों को मिली मंज़ूरी

 


पटना, 29 जुलाई (हि.स.)। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में विकास, कृषि, पेयजल, सहकारिता, शिक्षा, खेल, न्यायिक व्यवस्था और महिला एवं बाल विकास से जुड़े कुल 24 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

कैबिनेट ने प्रखंड स्तरीय आधारभूत संरचना के निर्माण, सहकारी समितियों को कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने, रीफर (शीतित) वाहनों की व्यवस्था विकसित करने, सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण, वर्मी कम्पोस्ट इकाइयों की स्थापना, चीनी मिलों के पुनरुद्धार, पेयजल परियोजनाओं, इंजीनियरिंग एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों के आधुनिकीकरण तथा आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका के 22 हजार पदों पर नियुक्ति सहित कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगाई।

जमुई जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-333ए पर दो नए उच्चस्तरीय आरसीसी पुलों के निर्माण को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई। इसके तहत खैरा-सोनो पथ के 72वें किलोमीटर पर क्यूल नदी स्थित नरियाना घाट पर 93.82 करोड़ रुपये की लागत से नया पुल बनाया जाएगा। वहीं, खैरा-सोनो पथ के 80वें किलोमीटर पर मंगोबंदर-सुकनर नदी पर 55.96 करोड़ रुपये की लागत से दूसरे पुल का निर्माण होगा। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से क्षेत्र में आवागमन सुगम होगा और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।

मंत्रिमंडल ने दरभंगा के रैयाम और मधुबनी के सकरी स्थित बंद पड़ी चीनी मिल परिसरों में नई सहकारी चीनी मिलों तथा गन्ना उपोत्पाद आधारित उद्योगों की स्थापना की परियोजना को भी मंजूरी दी। सरकार के अनुसार इस पहल से गन्ना किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा, स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा मिथिलांचल में औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

केंद्र प्रायोजित अमृत 2.0 मिशन के तहत लखीसराय और किशनगंज जलापूर्ति परियोजनाओं को भी प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। लखीसराय जलापूर्ति योजना के लिए 150.96 करोड़ रुपये तथा किशनगंज जलापूर्ति योजना के लिए 53.71 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन योजनाओं के माध्यम से लाखों लोगों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने और शहरी आधारभूत संरचना को सुदृढ़ बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

कैबिनेट ने बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन योजना के तहत वेजफेड की त्रि-स्तरीय सहकारी व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण एवं विस्तार के लिए 106.39 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी। साथ ही समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) के अंतर्गत आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिका के 22 हजार पदों पर नियुक्ति की स्वीकृति भी प्रदान की गई। इसके अलावा आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका चयन (संशोधन) मार्गदर्शिका-2026 को भी मंजूरी दी गई।

कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के उद्देश्य से केंद्र प्रायोजित प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 97.48 करोड़ रुपये की लागत से योजना के कार्यान्वयन, निकासी एवं व्यय की स्वीकृति दी गई। वित्तीय वर्ष 2026-27 में बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर को वेतन एवं पेंशन भुगतान के लिए 158.62 करोड़ रुपये के सहायक अनुदान की मंजूरी भी दी गई।

चतुर्थ कृषि रोड मैप के अंतर्गत केंद्र प्रायोजित सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकेनाइजेशन योजना के लिए 236.58 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई। इस राशि से किसानों को अनुदानित दर पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जाएंगे, कस्टम हायरिंग सेंटर, किसान ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर तथा ग्राम स्तर पर कृषि यंत्र बैंक स्थापित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त राज्य के सभी 38 जिलों में पक्का वर्मी कम्पोस्ट इकाई, गोबर एवं बायोगैस इकाई तथा व्यावसायिक वर्मी कम्पोस्ट इकाइयों की स्थापना के लिए 30.17 करोड़ रुपये की योजना को भी मंजूरी दी गई।

राज्य में खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बिहार खेल नीति-2026 को भी कैबिनेट ने स्वीकृति प्रदान की। इसके साथ ही क्षेत्रीय पुलिस महानिदेशक तथा सभी क्षेत्रीय कार्यालयों के लिए पुलिस महानिरीक्षक एवं पुलिस उपमहानिरीक्षक को लघु निर्माण कार्यों में पूर्व से प्रत्यायोजित वित्तीय शक्तियों में वृद्धि करने का निर्णय लिया गया।

उच्च तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सात निश्चय कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य के 38 राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों में मशीनों, उपकरणों, कम्प्यूटर एवं अन्य आवश्यक सामग्रियों की खरीद और स्थापना के लिए 60.49 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। इसी प्रकार 46 राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों के लिए भी समान राशि की स्वीकृति प्रदान की गई।

न्यायिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य सरकार ने जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश के 19 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी। वहीं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत पटना में दो और मुजफ्फरपुर में एक अतिरिक्त विशेष न्यायालय के गठन के लिए जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश के तीन नए पदों के सृजन को भी स्वीकृति प्रदान की गई।

राज्य सरकार का कहना है कि कैबिनेट के इन निर्णयों से आधारभूत संरचना के विकास, कृषि आधुनिकीकरण, औद्योगिक विस्तार, पेयजल आपूर्ति, तकनीकी शिक्षा, खेल, न्यायिक व्यवस्था और महिला एवं बाल विकास के क्षेत्रों में नई गति मिलेगी तथा रोजगार के अवसरों का विस्तार होगा।-------------

हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी