ईंट-भट्ठा मालिकों को बकाया मूल राशि एकमुश्त जमा करने पर ब्याज में मिलेगी छूट : डॉ. प्रमोद कुमार

 


-ईंट भट्ठा कारोबारियों को ओटीएस से राहत, ब्याज माफी के साथ 204 करोड़ की होगी वसूली-करीब छह हजार संचालक जमा करेंगे मूल बकाया राशि, 21 सितंबर से 20 दिसंबर तक मिलेगा मौका

पटना, 18 सितंबर (हि.स.)। बिहार में वर्षों से बकाया राशि और उस पर चढ़ते ब्याज के बोझ से परेशान ईंट भट्ठा कारोबारियों को राज्य सरकार ने राहत दी है। सरकार ने वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) योजना के तहत बकाया राशि के निपटारे का रास्ता साफ कर दिया है। इसके तहत करीब छह हजार ईंट भट्ठा संचालकों को बकाया मूल राशि एकमुश्त जमा करनी होगी, जबकि निर्धारित शर्तों के तहत ब्याज की राशि माफ की जाएगी। इस प्रक्रिया से सरकार को करीब 204 करोड़ 38 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है।

राज्य के खान एवं भूतत्व विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने शुक्रवार को अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित पत्रकार वार्ता में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ईंट भट्ठा कारोबारियों के प्रतिनिधियों के साथ बकाया राशि के समाधान को लेकर कई दौर की बैठकें हुई थीं। कारोबारियों की ओर से लंबे समय से एकमुश्त भुगतान की व्यवस्था की मांग की जा रही थी। मामले को मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाए जाने के बाद हाल में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में ओटीएस के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

मंत्री ने बताया कि ओटीएस के तहत संबंधित ईंट भट्ठा संचालकों को 21 सितंबर से 20 दिसंबर 2026 तक निर्धारित अवधि में मूल बकाया राशि एकमुश्त सरकार के कोष में जमा करनी होगी। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने वालों को पूर्व व्यवस्था के तहत बकाया राशि ब्याज सहित जमा करनी होगी।

उन्होंने बताया कि ईंट भट्ठा संचालकों के स्तर पर करीब 316.66 करोड़ रुपये राजस्व संग्रहण के लिए लंबित था। इसमें से 27.28 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है। वर्तमान में 289.38 करोड़ रुपये लंबित हैं। निर्धारित अवधि में बकाया राशि का भुगतान करने पर इसमें शामिल करीब 85 करोड़ रुपये की ब्याज राशि माफ की जाएगी।

डॉ. प्रमोद ने कहा कि ओटीएस का उद्देश्य वर्षों से लंबित राजस्व की वसूली के साथ ईंट भट्ठा कारोबारियों को ब्याज के अतिरिक्त वित्तीय बोझ से राहत देना है। इससे पुराने बकाये के कारण कारोबारियों को हो रही परेशानियों का भी समाधान होगा।

मंत्री ने बताया कि बिहार में ईंट भट्ठा उद्योग को पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में भी काम किया गया है। ईंट निर्माता संघ से जुड़े कारोबारियों ने जिग-जैग तकनीक अपनाई है। इससे भट्ठों से निकलने वाले धुएं और प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि अवैध रूप से संचालित ईंट भट्ठों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री ने जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) की राशि के इस्तेमाल में किए गए बदलाव की भी जानकारी दी। अब डीएमएफ की 70 प्रतिशत राशि उसी प्रखंड में खर्च की जाएगी, जहां खनिज का खनन हो रहा है, जबकि 30 प्रतिशत राशि जिले के अन्य प्रखंडों में खर्च होगी। पहले यह अनुपात 60:40 था। संबंधित जिले के सांसदों, विधान परिषद सदस्यों और विधायकों को भी जिला खनिज फाउंडेशन की सदस्यता दी गई है।

मंत्री के अनुसार, जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि पत्थर खनन को गति देने के लिए विभिन्न जिलों में खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया आगे बढ़ी है। नवादा और शेखपुरा में ब्लॉकों की नीलामी हो चुकी है। अन्य जिलों में भी जल्द प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है। खनिज क्षेत्र से जुड़े विषयों पर 22 सितंबर को भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के साथ बैठक प्रस्तावित है।

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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी