बिहार में आंगनवाड़ी बच्चों को मिली जीविका दीदियों द्वारा निर्मित पोशाक
-ईआरपी व मोबाइल ऐप का हुआ शुभारंभ
पटना, 18 जनवरी (हि.स.)। बिहार सरकार के नेतृत्व में बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों में नामांकित 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए पोशाक वितरण कार्यक्रम का आयोजन रविवार को पटना स्थित दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान में किया गया। पटना में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार उपस्थित रहे।
इसी क्रम में यह कार्यक्रम राज्य के सभी 9 प्रमंडलों में जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों द्वारा एक साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान जीविका दीदियों द्वारा निर्मित मानक गुणवत्ता की पोशाक आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़े बच्चों के बीच वितरित की गई। यह पहल बच्चों के पोषण, स्वच्छता, आत्मसम्मान एवं समग्र विकास को सुदृढ़ करने के साथ-साथ महिला स्वयं सहायता समूहों को आजीविका के अवसर प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
दरअसल, राज्य में वर्तमान में 1,15,064 आंगनवाड़ी केंद्र 544 परियोजनाओं के माध्यम से संचालित हैं। पूर्व में 52,82,132 नामांकित बच्चों के लिए पोशाक की स्वीकृति दी गई थी। इस योजना के अंतर्गत 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को पोशाक उपलब्ध कराने के लिए कुल 211.28 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। पहले प्रति बच्चा 400 रुपये की राशि दी जाती थी, जबकि अब गुणवत्तापूर्ण एवं मानकीकृत पोशाक सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जीविका एवं आईसीडीएस निदेशालय के बीच हुए समझौता ज्ञापन के तहत प्रत्येक पात्र बच्चे को दो सेट पोशाक उपलब्ध कराई जा रही है।
पटना में आयोजित कार्यक्रम में स्टिचिंग मॉनिटरिंग सिस्टम के अंतर्गत विकसित ईआरपी एवं मोबाइल ऐप का भी शुभारंभ किया गया, जिससे पोशाक निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण एवं वितरण की प्रक्रिया को डिजिटल रूप से ट्रैक और मॉनिटर किया जा सकेगा।
इस अवसर पर समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चे राज्य का भविष्य हैं और उनके पोषण एवं गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। जीविका दीदियों द्वारा तैयार पोशाक बच्चों को समानता और सम्मान प्रदान करती है तथा यह महिला सशक्तिकरण और स्थानीय रोजगार सृजन का सशक्त उदाहरण है।
समाज कल्याण विभाग की सचिव बंदना प्रेयषी ने कहा कि बड़ी संख्या में बच्चों तक पोशाक की आपूर्ति एक व्यापक प्रशासनिक कार्य है। इसे ध्यान में रखते हुए जीविका के साथ समन्वय कर पूरी प्रक्रिया को संरचित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया गया है। उन्होंने बताया कि ईआरपी एवं मोबाइल ऐप आधारित प्रणाली से सिलाई, गुणवत्ता परीक्षण एवं वितरण के प्रत्येक चरण की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह पहल आंगनवाड़ी सेवाओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ महिला स्वयं सहायता समूहों को स्थायी आजीविका से जोड़ते हुए बाल कल्याण और महिला सशक्तिकरण—दोनों लक्ष्यों को एक साथ आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।----------
हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी