विक्रमशिला सेतु बंद होने से रोजी-रोटी का संकट: छोटी नावों के परिचालन के लिए जनता दरबार पहुंचे नाविक

 


भागलपुर, 26 अक्टूबर (हि.स.)। विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद गंगा नदी के दोनों किनारों के बीच यातायात बहाल रखने के लिए जिला प्रशासन द्वारा बियाडा घाट से बड़े जहाजों के जरिए यात्रियों का आवागमन कराया जा रहा है। इस बीच, स्थानीय नाविकों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है। अपनी मांगों को लेकर बड़ी संख्या में स्थानीय नाविक सोमवार को जिलाधिकारी के जनता दरबार पहुंचे और छोटी नावों के परिचालन की अनुमति देने की गुहार लगाई।

जनता दरबार में पहुंचे नाविकों ने जिला प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में कहा कि उनके पास सुरक्षित और छोटी नावें हैं, जिन्हें चलाने की अनुमति दी जाए। उन्होंने प्रशासन को आश्वस्त किया कि वे सुरक्षा के दृष्टिकोण से निर्धारित सभी नियमों और शर्तों का पालन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। नाविकों ने दलील दी कि पहले जब गंगा में पानी अधिक था, तब सुरक्षा कारणों से अनुमति नहीं दी जा रही थी, लेकिन अब गंगा का जलस्तर काफी कम हो गया है। ऐसे में छोटी नावों का परिचालन पूरी तरह सुरक्षित है।

नाविकों ने बताया कि जब विक्रमशिला सेतु को मरम्मत के लिए बंद करने की घोषणा हुई थी, तो उन्हें उम्मीद जगी थी कि इस बार उन्हें भी यात्रियों को पार कराने का अवसर मिलेगा। इसी उम्मीद में कई नाविकों ने कर्ज लेकर नई नावें खरीदी थीं। लेकिन प्रशासन द्वारा सिर्फ बड़े जहाजों को अनुमति दिए जाने से उनकी नावें घाट पर बेकार खड़ी हैं, जिससे उनके सामने परिवार के भरण-पोषण और कर्ज की किस्तें चुकाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। नाविकों ने पुराने समय को याद करते हुए कहा कि पूर्व में भी जब सेतु पर संकट आता था या बाढ़ जैसी स्थिति होती थी, तब प्रशासन के निर्देश पर वे अपनी नावों से यात्रियों को मुफ्त में गंगा पार कराते थे। इसके एवज में जिला प्रशासन द्वारा बाद में उन्हें तयशुदा राशि का भुगतान किया जाता था।

नाविकों का कहना है कि वे इस बार भी उसी तर्ज पर काम करने के लिए तैयार हैं ताकि बियाडा घाट पर उमड़ रही यात्रियों की भारी भीड़ को भी राहत मिले और उनकी रोजी-रोटी भी चल सके। जिलाधिकारी ने नाविकों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उचित विभागीय समीक्षा के बाद आवश्यक कदम उठाने का भरोसा दिया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर