मैथिली को मिला शिक्षा व्यवस्था में सम्मानजनक स्थान, यह करोड़ों लोगों की भावनाओं का सम्मान : संजय सरावगी

 


पटना, 25 मई (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री संजय सरावगी ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा कक्षा 1 से माध्यमिक स्तर तक मैथिली भाषा को मातृभाषा विषय के रूप में मान्यता दिए जाने का स्वागत करते हुए इसे मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, भाषाई गौरव और करोड़ों मैथिली भाषियों की भावनाओं का सम्मान बताया है।

प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि यह निर्णय मिथिला की संस्कृति और मातृभाषा मैथिली को शिक्षा व्यवस्था में सशक्त एवं सम्मानजनक स्थान प्रदान करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। लंबे समय से मैथिली भाषा के संरक्षण, संवर्धन और शिक्षा व्यवस्था में इसके व्यापक समावेश की मांग की जा रही थी। ऐसे में सीबीएसई पाठ्यक्रम में मैथिली को मातृभाषा विषय के रूप में शामिल किया जाना पूरे मिथिलांचल और बिहार के लिए गर्व और सम्मान का विषय है।

उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह किसी समाज की संस्कृति, इतिहास, परंपरा, जीवन मूल्यों और सामूहिक चेतना की वाहक होती है। मैथिली भाषा ने सदियों से साहित्य, दर्शन, लोक संस्कृति और सामाजिक चेतना को समृद्ध किया है। महाकवि विद्यापति की परंपरा से लेकर मिथिला की लोक विरासत तक, मैथिली भारतीय सभ्यता की महत्वपूर्ण धरोहर रही है।

सरावगी ने कहा कि प्रारंभिक शिक्षा में मातृभाषा का समावेश बच्चों के बौद्धिक विकास, समझने की क्षमता और आत्मविश्वास को मजबूत करता है। जब बच्चे अपनी मातृभाषा में शिक्षा ग्रहण करते हैं तो सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होती है तथा वे अपनी संस्कृति और जड़ों से गहराई से जुड़े रहते हैं।

मैथिली को मिली यह मान्यता आने वाली पीढ़ियों को अपनी भाषा, संस्कृति और पहचान के प्रति गौरव का भाव प्रदान करेगी।

प्रदेश अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री का आभार जताया और कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय भाषाओं, स्थानीय संस्कृतियों और परंपराओं के संरक्षण तथा संवर्धन को लगातार प्राथमिकता दी गई है। नई शिक्षा नीति में भी मातृभाषा आधारित शिक्षा पर विशेष बल दिया गया है। यह निर्णय उसी सोच को आगे बढ़ाता है, जिसमें भारत की भाषाई विविधता को उसकी सबसे बड़ी शक्ति माना गया है।

उन्होंने कहा कि सीबीएसई पाठ्यक्रम में मैथिली को शामिल किए जाने से न केवल भाषा के संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि मैथिली साहित्य, शोध, अकादमिक अध्ययन और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी नई दिशा प्राप्त होगी। इससे मिथिला क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूती मिलेगी।

संजय सरावगी ने कहा कि यह निर्णय भारत की विविध भाषाई परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के सम्मान का प्रतीक भी है।

प्रदेश अध्यक्ष ने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए संबंधित संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सभी मैथिली भाषियों और बिहारवासियों को शुभकामनाएं दीं तथा कहा कि अब समाज के सभी वर्गों की जिम्मेदारी है कि वे अपनी मातृभाषा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाएं।

“मातृभाषा का सम्मान केवल भाषा का सम्मान नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा, इतिहास और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सम्मान है। मैथिली को मिली यह मान्यता मिथिला के गौरव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।”

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हिन्दुस्थान समाचार / सुरभित दत्त