बजट सत्र : बिहार विधानसभा में वर्ष 2022-23 की सीएजी रिपोर्ट पेश, 4,844 करोड़ का राजस्व बकाया
पटना, 26 फ़रवरी (हि.स.)। बिहार विधानसभा में गुरुवार को भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट पेश की गई। इस रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2022-23 के लिए बिहार सरकार की कुल आय 1,72,688.02 करोड़ थी जिसमें राज्य सरकार द्वारा अपने स्रोतों से प्राप्त राजस्व से 48,152.63 करोड़ जो विगत वर्ष से 9,313.75 करोड. (23.98 प्रतिशत) अधिक था। जबकि की केंद्र सरकार से प्राप्त का हिस्सा 1,24,535.39 करोड़ (कुल प्राप्तियों का 72.12 प्रतिशत) था।
आज पेश की गई सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च, 2023 तक 4,844 करोड़ राजस्व बकाया है। जिनमें से 1430.32 करोड़ पांच वर्षों से लंबित था। वहीं फसलों की सब्सिडी में अनियमितता की बातें सामने आई हैं। सीएजी ने एटीएस को लेकर परिवहन विभाग में गड़बड़ी का खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक एसओपी का पालन किए बगैर गाड़ियों के फिटनेस सर्टिफिकेट जारी हुए, जिससे सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ।
सीएजी रिपोर्ट में कृषि इनपुट सब्सिडी योजना में अनियमितताओं का खुलासा किया है। जिसमें 2019 में 10 ऐसे जिलों में 21.48 करोड़ की सब्सिडी का भुगतान किया गया, जिन्हें आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा बाढ़ प्रभावित घोषित नहीं किया गया था। इसके अलावा 14 अन्य जिलों के आवेदकों को 4.03 करोड़ की राशि का भुगतान किया गया, जबकि वे चिन्हित आपदा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल नहीं थे।
रबी और खरीफ मौसम 2019 और 2020 के दौरान कृषि विभाग द्वारा 151.92 करोड़ की सब्सिडी बांटी गई, जो चिन्हित फसल क्षति क्षेत्र से 1.34 लाख हेक्टेयर अधिक क्षेत्र में दी गई।
एसडीआरएफ के निर्धारित मानकों के अनुरूप सहायता दरों का पालन नहीं करने के कारण आवेदकों को 3.74 करोड़ का अधिक भुगतान किया गया। सब्सिडी आवेदन के प्रोसेसिंग और स्वीकृति के दौरान डेटाबेस में व्यावसायिक नियमों, अनुचित मैपिंग और निर्धारित प्रावधानों का अनुपालन नहीं किया गया। इसके चलते 15.53 लाख मामलों में 56.14 करोड़ का अधिक, कम या अनियमित भुगतान किया गया।
इसके अतिरिक्त, फसल क्षति क्षेत्र के 33 प्रतिशत से कम होने के बावजूद 2019-22 के दौरान 6,81,617 मामलों में 159.28 करोड़ की सब्सिडी का अस्वीकार्य भुगतान किया गया। माल एवं यात्रियों पर कर के रूप में 248 करोड़ 58 लाख रुपये का राजस्व बाकी।
रिपोर्ट के अुसार विद्युत पर कर एवं शुल्क के 20 लाख रुपये बकाए थे। वस्तु एवं सेवाओं पर तीन करोड़ 25 लाख रुपये बकाया। राज्य उत्पाद पर 54 करोड़ 30 लाख रुपया। खनन एवं धातु कर्म उद्योग पर 1505 करोड़ 16 लाख रुपये, खान एवं भूतत्व विभाग ने 5 वर्षों से अधिक समय से लंबित बकाया का विवरण नहीं दिया, राशि वसूली के लिए भू-राजस्व के रूप में नीलामवाद दयार किया गया है।
वाहनों पर कर के रूप में 183 करोड़ 39 लाख रुपये बकाए हैं, परिवहन विभाग ने 5 वर्षों से अधिक समय से लंबित बकायों का विवरण नहीं दिया है। विभाग ने लंबित बकाए की अवस्था को भी नहीं बताया।
भू-राजस्व में 302 करोड़ 47 लाख रुपये का राजस्व बकाया है। इसने भी 5 वर्षों से अधिक समय से लंबित बकाया का विवरण नहीं दिया।
मुद्रांक शुल्क एवं निबंधन फीस के रूप में 215.61 करोड़ रुपये बकाया है, मद्य निषेध विभाग ने भी 5 वर्षों से अधिक समय से लंबित बकाया का विवरण नहीं दिया।
बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम ने ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया। 94 लाख 25 हजार रुपये का फायदा दिया,जिससे कंपनी को हानि हुई। परिवहन वाहनों के फिटनेस प्रमाण पत्र में भी बड़ा खेल किया गया। जिससे सरकार को 2 करोड़ 27 लाख की राजस्व हानि हुई।
सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है की स्वचालित परीक्षण केंद्र से वाहनों की फिटनेस जांच के लिए मानक संचालन प्रक्रिया का अनुपालन नहीं किया गया। स्वचालित प्रणाली का उपयोग के बिना और सभी निर्धारित मापदंडों के अनुसार परीक्षण किए बिना ही सर्टिफिकेट दिए गए। 47,223 वाहनों में से 42,672, 90 फीसदी से अधिक ऐसे वाहनों को फिटनेस प्रमाण पत्र दिया गया जहां प्रावधानों का उल्लंघन किया गया।
फिटनेस का प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए अपॉइंटमेंट आवेदन ऑनलाइन नहीं की गई थी। इसके अलावा 66345 परीक्षण जांच किए गए वाहनों में से 35921 वाहनों का फिटनेस प्रमाण पत्र फेल हो गया था, जिससे सड़क और सार्वज निक सुरक्षा को खतरा था।
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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी