आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग को लेकर भाकपा ने निकाला प्रतिरोध मार्च

 


सुपौल, 27 जुलाई (हि.स.)। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर सोमवार को सुपौल में आंदोलनकारी छात्रों एवं नौजवानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने, जेल में बंद आंदोलनकारियों की रिहाई, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई तथा शिक्षा एवं परीक्षा प्रणाली को गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी बनाने की मांग को लेकर प्रतिरोध मार्च निकाला गया। लोहिया नगर चौक से डिग्री कॉलेज चौक तक निकाले गए इस प्रतिरोध मार्च में भाकपा कार्यकर्ताओं ने केंद्र एवं राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया।

प्रतिरोध मार्च का नेतृत्व कर रहे भाकपा के जिला मंत्री विद्यानंद कामत ने अपने संबोधन की शुरुआत परीक्षा संबंधी विवादों में जान गंवाने वाले छात्र-छात्राओं को श्रद्धांजलि अर्पित कर की। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी सुधार और प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाए बिना ऐसे आंदोलन रुकने वाले नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि छात्रों की जायज मांगों को दबाने के बजाय सरकार को शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। भाकपा के वरिष्ठ नेता विद्यानंद गुप्ता एवं ललन साह ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के निर्देश पर देशभर में आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई की गई है और कई छात्रों को झूठे मुकदमों में फंसाया गया है। उन्होंने सभी मुकदमे वापस लेने तथा जेल में बंद आंदोलनकारियों को तत्काल रिहा करने की मांग की।

किसान नेता चंदेश्वरी यादव एवं उपेंद्र यादव ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की आवाज को लाठी और गोली के बल पर नहीं दबाया जा सकता। वहीं भाकपा नेताओं शंभू शरण शर्मा एवं मोहम्मद अयूब ने शासन-प्रशासन की कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताया। प्रतिरोध मार्च में हरिहर तांती, योगेंद्र राम, राम प्रसाद शर्मा, अरविंद चौपाल सहित बड़ी संख्या में भाकपा कार्यकर्ता एवं समर्थक शामिल रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र