श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस धूमधाम से मनाया गया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

 


सुपौल, 19 सितंबर (हि.स.)। श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस शनिवार को कथा व्यास सोनम जी के मुखारविंद से भगवान श्रीकृष्ण के पावन जन्मोत्सव की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा में भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का प्रसंग आते ही पूरा कथा पंडाल ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर पुष्पवर्षा कर खुशियां मनाईं। कथा व्यास सोनम जी ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की दिव्य कथा सुनाते हुए कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है और धर्म की हानि होती है, तब भगवान भक्तों की रक्षा एवं धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं। कंस के अत्याचारों से त्रस्त पृथ्वी और देवताओं की प्रार्थना पर भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी और वसुदेव के यहां दिव्य रूप में प्राकट्य लिया।

कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भी सुंदर वर्णन किया गया। जन्मोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भगवान के जयकारे लगाए। इससे कथा स्थल का वातावरण आनंद, उत्साह और भक्ति से सराबोर हो गया। व्यास सोनम जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, करुणा, धर्म, सत्य और निष्काम कर्म का संदेश देता है। मनुष्य को विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान पर विश्वास रखते हुए अपने कर्तव्य के मार्ग पर चलते रहना चाहिए। श्रीमद्भागवत कथा के साथ आयोजित मेले में भी लोगों की भीड़ उमड़ रही है।

मेले में विभिन्न प्रकार के झूले आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इनमें टोरा-टोरा, टावर झूला, नौ झूला, सुनामी झूला सहित बच्चों के लिए मिकी माउस, पालकी, हाथी-घोड़ा आदि झूले लगाए गए हैं। वहीं महिलाओं के लिए मीना बाजार भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण से परिवार एवं समाज में सुख, शांति, समृद्धि और सद्भाव की कामना की।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र