भागलपुर के रेशम को मिलेगा बड़ा बाजार, जीरो माइल में खरीदारों और उत्पादकों का हुआ महाजुटान

 


भागलपुर, 03 नवंबर (हि.स.)। अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता और विशिष्ट पहचान के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध भागलपुर के रेशमी वस्त्रों को अब बड़े बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। स्थानीय रेशम उत्पादकों को बड़े खरीदारों से जोड़ने, उनके उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों का विस्तार करने के उद्देश्य से जीरो माइल स्थित रेशम भवन में मंगलवार को एक भव्य बॉयर्स-सेलर्स मीट का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जीविका एवं वूमेन वर्ल्ड बैंकिंग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ।

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि उप विकास आयुक्त (डीडीसी) श्री रवि राकेश ने किया। इस अवसर पर जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक, जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक सुनिर्मल गरेन और नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम) सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ पदाधिकारी, सिल्क उद्यमी, उत्पादक समूहों की महिलाएं तथा बड़ी संख्या में खरीदार उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप विकास आयुक्त राकेश ने कहा कि तसर सिल्क भागलपुर की विशिष्ट पहचान और गौरव रहा है। यहां के रेशमी वस्त्रों की गुणवत्ता एवं पारंपरिक बुनाई कला की दुनिया दीवानी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन से स्थानीय सिल्क उत्पादकों और बड़े खरीदारों के बीच सीधा संपर्क एवं बेहतर समन्वय स्थापित होगा। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी, उत्पादकों को अपने उत्पादों के लिए नए बड़े बाजार मिलेंगे और उनकी आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। इस बॉयर्स-सेलर्स मीट में रेशमी वस्त्रों का उत्पादन करने वाले महिला समूहों एवं स्थानीय उद्यमियों ने अपने बेहतरीन उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई।

जीविका स्वयं सहायता समूह की सदस्य और हैंडलूम सिल्क के उत्पादन व व्यवसाय से जुड़ीं बीवी शबनम, प्रति कुमारी, अमृता कुमारी, फरजान और जूली कुमारी सहित भागलपुर की कई महिला उद्यमियों ने इसमें उत्साहपूर्वक भागीदारी की। इसके साथ ही पड़ोसी जिले बांका से आए कुछ सिल्क उद्यमियों ने भी हिस्सा लिया और अपने उत्पादों व व्यावसायिक अनुभवों को साझा किया। कार्यक्रम के दौरान देश के कोने-कोने से आए खरीदारों और स्थानीय उत्पादकों के बीच उत्पादों की गुणवत्ता, आधुनिक डिजाइन, सही कीमत, बाजार की मांग, आपूर्ति श्रृंखला तथा भविष्य की व्यावसायिक संभावनाओं पर गहन चर्चा हुई। इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य महिला उद्यमियों को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर उन्हें सीधे मुख्यधारा के बाजार से जोड़ना, उचित मूल्य दिलाना और उनके व्यवसाय को एक व्यापक पहचान प्रदान करना है।

जीविका के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आजीविका एवं उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह बॉयर्स-सेलर्स मीट भागलपुर के पारंपरिक रेशम उद्योग को नई व्यावसायिक ऊंचाइयों पर ले जाने के साथ-साथ महिला उद्यमियों की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर