बीएड नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए दीक्षारंभ-सह-वर्गारंभ समारोह आयोजित

 


दरभंगा, 22 सितंबर (हि.स.)। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय अंतर्गत शिक्षाशास्त्र विभाग में बीएड सत्र 2026-28 के नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं के लिए मंगलवार को दीक्षारंभ-सह-वर्गारंभ समारोह आयोजित किया गया। समारोह का उद्देश्य विद्यार्थियों को शैक्षणिक गतिविधियों, अनुशासन, शिक्षक-प्रशिक्षण तथा भावी शिक्षक के दायित्वों से परिचित कराना था।

मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र विभाग के प्रो. मुनेश्वर यादव ने कहा कि शिक्षक एवं शिक्षण संस्थान ‘इंडस्ट्री ऑफ नॉलेज’ के रूप में कार्य करते हैं, जहां नए विचारों और ज्ञान का सृजन होता है। शिक्षक को सकारात्मक एवं सृजनात्मक दृष्टिकोण के साथ विद्यार्थियों के प्रति स्नेह, संवेदना और जिम्मेदारी का भाव रखना चाहिए। शिक्षक का ज्ञान, संवेदना एवं आचरण ही समाज निर्माण की दिशा तय करता है।

विशिष्ट अतिथि कुलसचिव डॉ. दिव्या रानी हांसदा ने कहा कि अच्छे शिक्षक के निर्माण की पहली शर्त अनुशासन एवं कर्तव्य के प्रति ईमानदारी है। शिक्षक का आचरण केवल विद्यार्थियों को ही नहीं, बल्कि व्यापक रूप से समाज को प्रभावित करता है।

अध्यक्षता करते हुए दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. एच.के. सिंह ने जॉन ड्यूई के ‘गार्डन थॉट’ की चर्चा की। उन्होंने कहा कि शिक्षक को विद्यार्थियों की अंतर्निहित क्षमताओं को पहचानकर उनके विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना चाहिए। शिक्षक में ‘हेड, हार्ट एंड हैंड’ का समन्वय आवश्यक है।

विभागाध्यक्ष डॉ. अरविन्द कुमार मिलन ने अतिथियों एवं विद्यार्थियों का स्वागत किया। मंच संचालन डॉ. निधि वत्स ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रेशमा तबस्सुम ने किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / Krishna Mohan Mishra