बाल विवाह मुक्त भारत, बचपन को बंधन नही, सपनो की उड़ान चाहिए

 


बक्सर, 09 जनवरी (हि.स.)। “बाल विवाह मुक्त भारत 100 दिवसीय अभियान” के अंतर्गत न्यायालय परिसर स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकार के प्रांगण में एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुक्रवार को आयोजित हुआ।इसकी अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार काजल झाम्ब ने की।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ अवर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी- सह- सचिव नेहा दयाल, स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष प्रवीण कुमार सिंह श्रीनेत, चीफ विधिक सहायता प्रतीक्षा प्रणाली विनय कुमार सिंहा सहित मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। मंच संचालन पैरा विधिक स्वयंसेवक शत्रुघ्न सिन्हा ने किया। वक्ताओ ने एक स्वर में कहा कि बचपन को बंधन नही, सपनो की उड़ान चाहिए।

कार्यक्रम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा सेविका, पैरा विधिक स्वयंसेवक एवं आशा इकाई के सदस्यों को बाल विवाह की परिभाषा, कानूनी आयु, बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006, इसके सामाजिक दुष्प्रभाव, दंड प्रावधान तथा सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की और 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह कानूनन अपराध है, जिसमें दो वर्ष तक की सजा व जुर्माने का प्रावधान है।

प्रशिक्षण में “बाल विवाह मुक्त भारत” प्रतिज्ञा लेने, पोर्टल पर शपथ एवं प्रमाण पत्र प्राप्त करने की जानकारी भी दी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त बनाना और बच्चों के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करना बताया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिलीप कुमार ओझा