आयुष्मान कार्ड निर्माण में सुपौल बिहार में छठे स्थान पर, जिले में 11.31 लाख से अधिक व्यक्तिगत कार्ड बने

 


सुपौल, 08 सितंबर (हि.स.)। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत आयुष्मान कार्ड निर्माण अभियान में सुपौल जिले ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए पूरे बिहार में छठा स्थान हासिल किया है। जिले में आयुष्मान कार्ड निर्माण की उपलब्धि 50.59 प्रतिशत दर्ज की गई है।

जिले में आयुष्मान कार्ड निर्माण के लिए कुल 4 लाख 71 हजार 240 परिवारों को लक्ष्य में शामिल किया गया है। इनमें से अब तक 4 लाख 57 हजार 106 परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। वहीं व्यक्तिगत आयुष्मान कार्ड निर्माण का लक्ष्य 22 लाख 36 हजार 490 निर्धारित किया गया है, जिसके विरुद्ध अब तक 11 लाख 31 हजार 384 व्यक्तिगत कार्ड बनाए जा चुके हैं। कार्ड निर्माण अभियान को गति देने के लिए स्वास्थ्य संस्थानों के साथ-साथ ग्रामीण स्तर पर भी पात्र लाभुकों को सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। विशेष शिविरों का आयोजन कर अधिक से अधिक पात्र लोगों तक पहुंच बनाने और उन्हें योजना का लाभ दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।

जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत आठ निजी अस्पताल और 10 सरकारी स्वास्थ्य संस्थान सूचीबद्ध हैं। पात्र लाभुक इन सूचीबद्ध अस्पतालों में योजना के प्रावधानों के अनुसार चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। आयुष्मान कार्ड का निर्माण स्कैन शेयर संचालक, आरोग्य मित्र, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, आशा कार्यकर्ता, साझा सेवा केंद्र संचालक, प्रिया तथा प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में तैनात संचालकों के माध्यम से किया जा रहा है।

जिले में आयुष्मान वय वंदना कार्ड बनाने का अभियान भी जारी है। अब तक जिले में 10 हजार 20 वय वंदना कार्ड बनाए जा चुके हैं। योजना के तहत 70 वर्ष या उससे अधिक आयु का प्रत्येक भारतीय नागरिक, उसकी आय या आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना, पात्र है। वहीं, सामान्य आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लिए पात्र परिवार का नाम राशन कार्ड के आंकड़ों में होना आवश्यक है।

जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि जिले का कोई भी पात्र परिवार आयुष्मान भारत योजना के लाभ से वंचित न रहे। इसके लिए प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने के साथ ही कार्ड निर्माण कार्य को और तेज करने पर जोर दिया जा रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र