संभावित ड्राफ्ट में सुधार की मांग

 


पटना, 16 मार्च (हि.स.)।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) समस्तीपुर इकाई द्वारा विश्वविद्यालय शिक्षक नियुक्ति के संभावित ड्राफ्ट में सुधार की मांग को लेकर जिलाधिकारी के माध्यम से कुलाधिपति सह महामहिम राज्यपाल को मांग पत्र भेजा ।

इस अवसर पर प्रांत सहमंत्री अनुपम कुमार झा ने कहा है बिहार की उच्च शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण एवं भारत-केंद्रित बनाने के लिए अभाविप निरंतर संघर्षरत हैं। विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए तैयार किए गए संभावित ड्राफ्ट पर परिषद का स्पष्ट मत है कि इस में अनेक ऐसी विसंगतियाँ हैं जो न केवल योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय करती हैं बल्कि राज्य की उच्च्च शिक्षा व्यवस्था को भी कमजोर करने का काम करती हैं। बिहार के विश्वविद्यालय पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। वर्षों से स्थायी नियुक्तियां नहीं होने के कारण शोध, नवाचार और शैक्षणिक गुणवत्ता लगातार प्रभावित हो रही है। ऐसे समय में यदि शिक्षकों की नियुक्ति के लिए तैयार किया गया ड्राफ्ट ही त्रुटिपूर्ण होगा, तो यह राज्य की उच्च शिक्षा के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ होगा।

उन्होंने कहा कि यूजीसी रेगुलेशन 2018 स्पष्ट रूप से कहता है कि विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति नेट/सेट, अकादमिक रिकॉर्ड एवं साक्षात्कार के आधार पर होनी चाहिए। इसके बावजूद नेट उत्तीर्ण अभ्यर्थियों से पुनः लिखित परीक्षा लेने का प्रावधान यूजीसी मानकों का सीधा उल्लंघन है। साथ ही नियुक्ति प्रक्रिया में 80 प्रतिशत वेटेज केवल लिखित परीक्षा को देना शोध कार्य, पब्लिकेशन, शिक्षण अनुभव और अन्य अकादमिक उपलब्धियों को पूरी तरह दरकिनार करना है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की नेट परीक्षा उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को नेट उत्तीर्ण नहीं करने वाले अभ्यर्थियों के साथ एक ही श्रेणी में रखना नेट की महत्ता को कम करने का प्रयास है। वहीं प्रस्तावित ड्राफ्ट में अधिकतम आयु सीमा को 45 वर्ष करना भी अनुचित है, क्योंकि विश्वविद्यालयों में नियुक्तियां लंबे अंतराल पर होती हैं और शोध कार्य में भी कई वर्ष लगते हैं। इससे बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे। साक्षात्कार के लिए 40 अंक निर्धारित किया जाना भ्रष्टाचार की संभावनाओं को बढ़ाते हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की माँग है कि साक्षात्कार के अंक 20 किए जाएं और चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए। साथ ही पीएचडी धारकों को मात्र सातकोत्तर नेट उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के बराबर वेटेज देना भी पीएचडी की महत्ता को कम करता है।

जिला संयोजक केशव माधव एवं जिला सहसंयोजक शुभम कुमार ने कहा कि बिहार के युवाओं के हितों की अनदेखी हो रही है क्योंकि देश के कई राज्यों में सहायक प्राध्यापक नियुक्ति में डोमिसाइल नीति के तहत स्थानीय अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि बिहार में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। यह राज्य के युवाओं के साथ अन्याय है और इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए। प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य निक्कू आर्या, एवं मोहम्मद ज़ुब्रैल ने कहा कि ड्राफ्ट में कई विषयों के संबद्ध विषयों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, जिससे भविष्य में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

हिन्दुस्थान समाचार / त्रिलोकनाथ उपाध्याय