डोमिसाइल नीति और स्थायी नियुक्ति के साथ हो सहायक प्राध्यापक बहाली: डॉ. स्नेहाशीष वर्धन

 


पटना, 01 जुलाई (हि.स.)। बिहार में सहायक प्राध्यापक नियुक्ति की नई नियमावली में यूजीसी के मानकों को दरकिनार कर बनाएं गए नियमों से नेट जेआरएफ और पीएचडी धारकों में भारी असंतोष व्याप्त है। इस नियमावली के कारण अभ्यर्थियों के एपीआई को अतार्किक तरीके से बनाया गया है जिसे यूजीसी के 2018 के बहाली नियमावली अनुसार ही बिहार में आगामी बहाली प्रक्रिया में समावेशित करना चाहिए। ये बातें बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने कही।

प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने कहा कि सहायक प्राध्यापक बहाली में डोमिसाइल नीति को भी सरकार दरकिनार कर देती है जिससे बिहार के नेट, जेआरएफ और पीएचडी धारकों को नौकरी से वंचित रह जाना पड़ता है और दूसरे राज्यों के अभ्यर्थी नियुक्ति पा जाते हैं। साथ ही उम्र सीमा को 40 साल करने की वकालत करना भी गैर जरूरी है।

फिक्स्ड टर्म नियुक्ति के स्थान पर राज्य सरकार को नियमित और स्थायी बहाली करने की ओर अपना ध्यान देना चाहिए। साथ ही 211 नई डिग्री महाविद्यालयों में लोक प्रशासन, दर्शनशास्त्र, संस्कृत और मास कम्युनिकेशन एवं पत्रकारिता के विषयों को भी शामिल कर बहाली निकाली जानी चाहिए।

सरकार अपने राज्य के अभ्यर्थियों को ज्यादा से ज्यादा मौका दें क्योंकि हर बार बिहार के अभ्यर्थी ठगे जाते हैं चाहे वें शिक्षक बहाली में हो या सहायक प्राध्यापक बहाली में रहे हो। इसलिए डोमिसाइल नीति आवश्यक तौर पर लागू करने की आवश्यकता है।

नई नियमावली में लिखित परीक्षा पर बोलते हुए बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने कहा कि सरकार नियुक्ति ना देना पड़े इसलिए ऐसे हथकंडे अपनाती है जिसमें पेपर लीक हो या प्रश्नों पर आपत्ति दर्ज हो और अभ्यर्थियों को बहाली देने में देरी हो और सरकार अपना पल्ला झाड़ती रहें।

हिन्दुस्थान समाचार / सुरभित दत्त