पश्चिम चंपारण के नंदनगढ़ में सम्राट अशोक जयंती का आयोजन
बेतिया, 25 मार्च (हि.स.)। राष्ट्रीय ऐतिहासिक धरोहर नंदनगढ़ स्थित अशोक स्तंभ परिसर में सम्राट अशोक सेना भारत के तत्वावधान में प्रियदर्शी सम्राट अशोक की जयंती अत्यंत श्रद्धा, गरिमा एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में बुधवार को संपन्न हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ बौद्ध अनुयायी विजय कश्यप, डॉ. उपेंद्र कुमार तथा जदयू जिलाध्यक्ष कन्हैया कुशवाहा समेत अन्य गणमान्य व्यक्तियों द्वारा सम्राट अशोक एवं भगवान बुद्ध के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।
इस अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सम्राट अशोक एवं भगवान बुद्ध के जीवन-दर्शन, त्याग, तप और मानवतावादी विचारों पर आधारित लोकगीतों की प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई, जिसने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। वक्ताओं ने अपने संबोधन में सम्राट अशोक को विश्व इतिहास का महान शासक एवं पथप्रदर्शक बताते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय संस्कृति को शांति, अहिंसा, करुणा और सह-अस्तित्व का सार्वभौमिक संदेश दिया। उनके द्वारा स्थापित शिक्षण संस्थान, औषधालय एवं विश्रामालय जनसेवा के आदर्श प्रतिमान हैं।
मुख्य अतिथि एमएलसी भीष्म सहनी ने कहा कि सम्राट अशोक का जीवन सत्ता से सेवा की ओर रूपांतरण की अनुपम मिसाल है। उनका बौद्ध धर्म ग्रहण करना न केवल व्यक्तिगत परिवर्तन था, बल्कि समस्त मानवता के लिए शांति और नैतिकता का मार्ग प्रशस्त करने वाला ऐतिहासिक निर्णय भी था। वहीं लौरिया एवं नरकटियागंज के कार्यपालक पदाधिकारी दिनेश पुरी ने कहा कि नंदनगढ़ एवं अशोक स्तंभ जैसी ऐतिहासिक विरासतों के संरक्षण एवं समुचित विकास हेतु ठोस कार्ययोजना तैयार की जा रही है। निकट भविष्य में इस स्थल को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सार्थक पहल की जाएगी।
बौद्ध अनुयायी विजय कश्यप ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सम्राट अशोक का संदेश केवल अतीत तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी अत्यंत प्रासंगिक मार्गदर्शन प्रदान करता है। उनके विचारों का व्यापक प्रचार-प्रसार ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। वक्ताओं ने वैश्विक परिदृश्य में बढ़ती अशांति के संदर्भ में सम्राट अशोक एवं भगवान बुद्ध के विचारों की प्रासंगिकता पर बल देते हुए कहा कि आज के समय में शांति, सद्भाव और सहिष्णुता की सर्वाधिक आवश्यकता है। लौरिया को ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए अशोक स्तंभ को गौरवशाली विरासत का प्रतीक निरूपित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन विनय कुशवाहा ने कुशलतापूर्वक किया, जबकि अध्यक्षता भारत कुशवाहा ने की। इस अवसर पर सीआरपीएफ कमांडेंट विशाल कुमार यादव, अस्मिता चौधरी, डीके कुशवाहा, डॉ. अब्दुल मजीद सहित अनेक विशिष्टजन उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त रंजीत कुशवाहा, शैलेश मौर्य, सिपाही चौधरी, जयप्रकाश पाल, नंदलाल बौद्ध, दूधनाथ कुशवाहा, हीरा कुशवाहा, अजय मौर्य, चंद्रिका राम, नागेंद्र कुशवाहा, शंभू बैठा, प्रभु कुशवाहा, अभय कुशवाहा, उमेश कुशवाहा, मनीष सम्राट, सूरज कुशवाहा, बजरंगबली कुशवाहा, धर्मेंद्र कुशवाहा, राजन राम, बेचू पासवान सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए अनेक गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
हिन्दुस्थान समाचार / अमानुल हक