जीविका ने बदली अंजू की किस्मत,अंधकार जिंदगी में लौटी रोशनी
अररिया 19 अगस्त(हि.स.)। अंजू देवी की कहानी दूसरी दीदियों से काफी अलग है। इन्होंने अपने संघर्ष और मेहनत के दम पर अपनी किस्मत बदली है। जिले के पलासी प्रखंड के बलुआ कलियागंज की रहने वाली अंजू की जिंदगी में शादी के बाद काफी उथल-पुथल हुआ। शादी के कुछ साल बाद ही पति छोड़कर चले गए। जिसके बाद अंजू के लिए आगे की जिंदगी जीना काफी दुश्वार सा हो गया था। उसे सहारा देने वाला कोई नहीं था। अपनी जिंदगी चलाने के साथ-साथ दो बच्चे की परवरिश करना अंजू के लिए बहुत मुश्किल हो गया था, जिसके बाद वो अपने मैके लौट आई। यहीं लोगों के घरों में झाड़ू-पोछा कर अपना और अपनी मां और दो बच्चों की परवरिश करने लगी।
अंजू की दयनीय स्थिति को देखते हुए पड़ोस में रहने वाली महिलाओं ने इन्हें जीविका के स्वयं सहायता समूह से जुड़ने को कहा। जिसके बाद वो साल 2018 में सना जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ गई। समूह की बैठकों में नियमित हिस्सा लेने से कई महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल हुई। जिसका लाभ अंजू को अपने दैनिक जीवन में होने लगा। अंजू की माली हालत को देखते हुए समूह की महिलाओं ने उनका नाम सतत् जीविकोपार्जन योजना के लाभार्थी के रूप में अनुमोदित किया,जिसका बाद इनसे रोजगार के बारे में पूछा गया कि वो क्या करना चाहेंगी। जिसपर अंजू ने ब्यूटी पार्लर खोलने की इच्छा जताई, क्योंकि मायके में उसने ब्यूटीशियन का काम सीखा था, जिसके बाद इन्हें जीविका की ओर से 10 हजार रुपये की मदद देकर ब्यूटी पार्लर चलाने की शुरूआत की गई। साथ ही इन्हें 20 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि भी इस व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए दी गई। इसका
इन्होंने भरपूर सदुपयोग किया। अपनी कड़ी मेहनत और लगन से इन्होंने इस व्यवसाय को काफी आगे बढ़ाया। जिसके कारण अंजू का ब्यूटी पार्लर अच्छा चलने लगा। इनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होने लगा। जीविका से जीवन यापन के लिए सात महीने तक एक-एक हजार रुपये की राशि भी दी गई। यह राशि भी इनके लिए काफी मददगार साबित हुई, जिसके बाद मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत इन्हें भी 10 हजार रुपये की राशि मिली। जिसे अंजू ने ब्यूटी पार्लर के सामान लाने में लगाया। आज इनकी आर्थिक हालत पहले से काफी बेहतर है। वो महीने में 15 से 20 हजार रुपये तक कमा रही हैं। परिवार चलाने के बाद कुछ पैसों की मासिक बचत भी कर रही हैं। बच्चों की परवरिश भी अच्छी तरह कर पा रही हैं। इनका आर्थिक और सामाजिक स्तर भी बदला है। अंजू इन सब चीजों के लिए जीविका को बहुत बड़ा कारण मानती हैं। उनका कहना है कि अगर उन्हें जीविका से मदद नहीं मिली होती तो आज भी वो किसी के घर में काम-काज ही करती रहती। लेकिन, जीविका से जुड़कर उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल कुमार ठाकुर