भागलपुर में आवारा पशुओं का आतंक, राहगीर परेशान, नगर निगम बेपरवाह
भागलपुर, 05 अगस्त (हि.स.)।
शहर की सड़कों पर इन दिनों आवारा पशुओं का आतंक चरम पर है। कचहरी चौक, तिलकामांझी, स्टेशन रोड और सुजागंज जैसे मुख्य व्यावसायिक इलाकों के साथ-साथ वार्ड संख्या 38 के स्थानीय मोहल्ले और गलियां भी इस समस्या की सबसे बड़ी शिकार बनी हुई हैं।
सड़कों के बीचो-बीच पशुओं के झुंड के कारण आए दिन राहगीर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। मवेशियों के आपस में लड़ने से सड़कों पर ट्रैफ़िक जाम आम बात हो चुकी है और रात के समय स्थिति और भी जानलेवा हो जाती है।
आवारा पशुओं की समस्या से निपटने में भागलपुर नगर निगम पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। शहर में पशुओं को पकड़ने के लिए न तो कोई विशेष अभियान चलाया जा रहा है और न ही पकड़े गए मवेशियों को रखने के लिए पशु आश्रय की कोई उचित व्यवस्था है।
निगम प्रशासन की सुस्ती के कारण धरातल पर मवेशी मालिकों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं दिख रही है। हालांकि, हाल ही में कुत्तों की बढ़ती संख्या को रोकने के लिए नगर निगम ने एनिमल बर्थ कंट्रोल योजना के तहत नसबंदी और टीकाकरण की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है, लेकिन धरातल पर बड़ी राहत का अब भी इंतजार है।
नगर निगम अधिनियम के अनुसार सार्वजनिक सड़कों पर मवेशी खुले छोड़ना पूरी तरह दंडनीय अपराध है। पशुओं को बेसहारा और लावारिस छोड़ने पर मालिकों पर भारी जुर्माने और जेल का प्रावधान है। सड़क बाधित करने वाले मवेशियों को जब्त करने और उनके मालिकों से जुर्माना वसूलने का अधिकार नगर निगम के पास सुरक्षित है। वहीं पशु के हमले से किसी भी प्रकार की जनहानि या चोट लगने पर पीड़ित परिवार मुआवजे की मांग कर सकता है।
वार्ड संख्या 38 के निवासियों में नगर निगम प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। स्थानीय निवासी रमेश कुमार ने बताया, वार्ड 38 की गलियों और मुख्य मोड़ पर शाम के समय पैदल चलना जान जोखिम में डालने जैसा है। नगर निगम हर तरह का टैक्स तो समय पर वसूलता है, लेकिन सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं के नाम पर हमें सिर्फ निराशा मिलती है।
वार्ड 38 की ही राहगीर सुप्रिया सिंह का कहना है, पिछले हफ्ते भी यहां एक सांड ने एक बाइक सवार को पूरी तरह से घायल कर दिया था। ऐसा लगता है कि निगम प्रशासन हाथ पर हाथ धरे किसी बड़े और जानलेवा हादसे का इंतजार कर रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर