प्रधान डाकघर की दीवारों पर जीवंत हुई अंग संस्कृति, मंजूषा कला से दिया सामाजिक और पर्यावरण जागरूकता का संदेश

 


भागलपुर, 27 अक्टूबर (हि.स.)। अंग प्रदेश की ऐतिहासिक लोक कला मंजूषा शिल्प को वैश्विक पटल पर स्थापित करने और इसके विकास की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। वरिष्ठ मंजूषा कलाकार सह प्राचार्या सुमना के कुशल नेतृत्व में 'अंग क्राफ्ट मंजूषा कला प्रशिक्षण केंद्र' के कलाकारों द्वारा भागलपुर हेड पोस्ट ऑफिस के प्रांगण की दीवारों को मंजूषा कला की अद्भुत कृतियों से सजाया जा रहा है। इस विशेष कला अभियान में केंद्र की प्रतिभावान कलाकार प्रीति कुमारी, कविता देवी, अर्चना कुमारी और रीना कुमारी दिन-रात लगकर अपनी कूची से डाकघर की दीवारों पर लोक संस्कृति के रंग बिखेर रही हैं। कलाकारों द्वारा तैयार की जा रही इन कलाकृतियों में न केवल अंग प्रदेश की समृद्ध विरासत, बल्कि सामाजिक और पर्यावरण जागरूकता का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। डाकघर की दीवारों पर मुख्य रूप से लोक पर्व और संस्कृति बिहार के आस्था का महापर्व 'छठ पूजा' और अंग क्षेत्र की प्रसिद्ध लोकगाथा 'बिहुला-विषहरी' का जीवंत चित्रण किया गया है। इसके अलावा भागलपुर के विश्वप्रसिद्ध 'कतरनी चूड़ा-धान' और ऐतिहासिक 'विक्रमशिला विश्वविद्यालय' की झलक प्रदर्शित किया गया है। वहीं समाज को बेहतर बनाने के लिए 'स्वच्छता' एवं 'पर्यावरण संरक्षण' का भी संदेश दिया गया है। इस कला पहल के माध्यम से भागलपुर प्रधान डाकघर आने वाले आम नागरिक और कला प्रेमी न सिर्फ अंग संस्कृति से रूबरू हो रहे हैं, बल्कि यह परिसर बेहद खूबसूरत और दर्शनीय बन गया है। संस्था और कलाकारों ने समस्त कला प्रेमियों और आदरणीय प्रबुद्ध जनों से आग्रह किया है कि वे डाकघर प्रांगण में आकर इन कलाकारों के हुनर और इस सुंदर बदलाव का अवलोकन करें तथा कलाकारों का उत्साहवर्धन करें।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर