राघोपुर का दर्द दिख रहा है, बाकी भागलपुर क्यों नहीं? मंत्रियों के घरों के कारण भेदभाव का आरोप: गौतम कुमार
भागलपुर, 06 सितंबर (हि.स.)। बिहार जनसंघर्ष समिति के संयोजक गौतम कुमार ने भागलपुर जिले में गंगा के भीषण कटाव और बाढ़ की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार, प्रशासन और मीडिया पर भेदभाव का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि खरीक प्रखंड के राघोपुर में कटाव की स्थिति बेहद गंभीर है और समिति राघोपुर के लोगों के साथ खड़ी है, लेकिन बाढ़ और कटाव का दर्द सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है।
जिले के नाथनगर, सबौर, सुल्तानगंज और इस्माइलपुर सहित कई अन्य प्रखंडों में भी हजारों लोग इस आपदा से पूरी तरह अस्त-व्यस्त हैं, मगर उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
गौतम कुमार ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि आज सरकार, प्रशासन और मीडिया का पूरा ध्यान केवल राघोपुर पर केंद्रित दिखाई दे रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वहां बिहार के दो कैबिनेट मंत्रियों के घर प्रभावित हैं, जिनमें से एक मंत्री का घर पानी में डूबा हुआ है। उन्होंने पूछा कि क्या बाढ़ पीड़ितों की पीड़ा का महत्व अब इस बात से तय होगा कि आपदा की जद में किसका घर आया है? बाढ़ किसी मंत्री का घर देखकर नहीं आती, इसलिए राहत कार्य भी मंत्रियों के घरों को देखकर नहीं चलाए जाने चाहिए। प्रशासनिक कार्यों और इंजीनियरिंग के तरीकों पर सवाल खड़े करते हुए उन्होंने कहा कि बाढ़ की इस विकराल स्थिति और गंगा की तेज धारा के बीच बोरी में मिट्टी और बालू भरकर बहाव को रोकने की कोशिश की जा रही है। क्या विशेषज्ञ और इंजीनियर यह नहीं जानते कि तेज बहाव के बीच ऐसी अस्थायी कोशिशें कितनी अप्रभावी साबित होती हैं? अगर यह प्रयास टिकाऊ नहीं है, तो जनता के खून-पसीने की कमाई को पानी में क्यों बहाया जा रहा है? बिहार जनसंघर्ष समिति के संयोजक ने मांग की है कि कटाव रोकने के नाम पर दिखावटी कार्यों में खर्च होने वाले पैसे का बेहतर उपयोग बाढ़ पीड़ितों की सीधी मदद के लिए होना चाहिए। इस राशि से पीड़ितों के लिए तत्काल राहत सामग्री, सुरक्षित पुनर्वास, भोजन, दवाइयां, नावों की पर्याप्त व्यवस्था, शुद्ध पेयजल और उनकी आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने बिहार सरकार और जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि भागलपुर के सभी बाढ़ एवं कटाव प्रभावित क्षेत्रों का बिना किसी भेदभाव के जमीनी आकलन किया जाए और सभी पीड़ितों के लिए समान रूप से तत्काल राहत, बचाव और पुनर्वास की व्यापक व्यवस्था लागू की जाए।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर