एडीजे प्रथम कोर्ट ने एनडीपीएस मामले में दोषी को सुनाई दस साल की सश्रम कारावास की सजा, एक लाख का जुर्माना

 


अररिया 07 अगस्त(हि.स.)। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम संजीत कुमार सिंह की अदालत ने शुक्रवार को अनाधिकृत रूप से नशीले पदार्थों के भंडारण और बिक्री के दोषी को दस साल की सश्रम कारावास के साथ साथ एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

साथ ही जुर्माने की रकम अदा नहीं करने पर दोषी को एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतने का भी आदेश अपने न्यायायिक निर्णय में दिया ।

सजा पाने वाला दोषी जोगबनी थाना क्षेत्र के अमौना निवासी 30 वर्षीय मो. उमर फारुक पिता मो. हासिम है। वहीं इसी मामले के एक अन्य आरोपी अमौना निवासी मो. खुर्शीद पिता मो.निजाम को न्यायालय ने साक्ष्य के आभाव में रिहा कर दिया।

न्यायालय ने एनडीपीएस की धारा 21 (सी)में दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। कोर्ट ने विशेष एनडीपीएस वाद 154/2025 में सजा सुनाई, जो जोगबनी थाना कांड संख्या 59/2025 से संबंधित है।सूचक एसएसबी 56वीं बटालियन के सुशील कुमार उपाध्याय हैं।

गुप्त सूचना के आधार पर 26 मई 2025 को अमौना में दोषी उमर फारूक की दवा दुकान से सटे घर से कुल 1454 बोतल कोडीन युक्त कफ सीरप, जिसकी कुल मात्रा 14.54 लीटर तथा नाइट्रोजाम 10 का 42 सौ टेबलेट बरामद किया गया था।

इसके अलावा 17 हजार रुपये भारतीय मुद्रा एवं 8 हजार 964 नेपाली मुद्रा बरामद की गई थी । प्रतिबंधित नशीली दवाओं के भंडारण और विक्रय का कोई वैध कागजात नहीं था ।

दोषी करार दिए आरोपी की जमानत याचिका पटना हाईकोर्ट से अस्वीकृत होने पर सुप्रीम कोर्ट में भी दायर की गई थी। जिसमे सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च 2026 को आदेश में छह महीने के भीतर वाद का विचारण करने का निर्देश जारी किया था ।

दोषी की ओर से अधिवक्ता मोजाहिद हुसैन ने न्यायालय से प्रथम अपराध के लिए कम से कम सजा सुनाए जाने की गुहार लगाई, जबकि विशेष लोक अभियोजक एनडीपीएस एक्ट के अशोक कुमार मिश्रा ने विधि सम्मत सजा सुनाई जाने की दलीलें न्यायालय के समक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने सजा सुनाई।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल कुमार ठाकुर