साक्ष्य के अभाव में डॉ. चक्रपाणि हिमांशु कोर्ट से ससम्मान बरी

 


भागलपुर, 23 सितंबर (हि.स.)। न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (द्वितीय), भागलपुर के राजेश रंजन की अदालत ने बुधवार को बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. चक्रपाणि हिमांशु को एक पुराने मामले में साक्ष्य के अभाव में ससम्मान बरी कर दिया।

मामला कोतवाली (विश्वविद्यालय) थाना कांड संख्या 55/2009 (जी.आर. संख्या 350/09) से जुड़ा था, जिसमें डॉ. हिमांशु के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149, 379 और 341 के तहत मुकदमा दर्ज था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद पाया कि डॉ. हिमांशु के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। इसके बाद अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से मुक्त करते हुए बरी करने का आदेश सुनाया।

इस मामले में डॉ. चक्रपाणि हिमांशु की ओर से बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता जितेन्द्र कुमार जीतू ने प्रभावी ढंग से पैरवी की और अदालत के समक्ष मजबूत दलीलें पेश कीं। डॉ. चक्रपाणि हिमांशु के कोर्ट से बरी होने की खबर मिलते ही उनके समर्थकों और शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई। न्यायालय के इस फैसले पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सरवर इमाम, गौतम बनर्जी, डॉ. अमर साह, विश्वजीत कुशवाहा, प्रकाश सिंह कुशवाहा, मोहम्मद नूर अहसन फरीदी, रविंद्र दास, गोपाल यादव, प्रीतम कुमार, अंकित कुमार और पंकज कुमार पंकज सहित दर्जनों गणमान्य लोगों ने न्यायपालिका के प्रति अपनी गहरी आस्था प्रकट करते हुए आभार व्यक्त किया है। समर्थकों का कहना है कि सत्य की जीत हुई है और उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा था।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर