ज्ञान भारतम् मिशन के तहत पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, संरक्षण व डिजिटलीकरण को लेकर बैठक

 


किशनगंज, 04 अप्रैल (हि.स.)। भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के उद्देश्य से “ज्ञान भारतम् मिशन” के अंतर्गत पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, संरक्षण एवं डिजिटलीकरण को लेकर जिलाधिकारी विशाल राज की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित सभागार में जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई।

बैठक में मिशन के उद्देश्य, राज्य सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग तथा भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों, जिला स्तरीय समिति के अनुमोदन, नोडल पदाधिकारी की नियुक्ति और प्रखंड स्तर पर टीम गठन को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही मानक संचालन प्रक्रिया, मोबाइल ऐप प्रशिक्षण, तीन माह की समयसीमा में सर्वेक्षण कार्य, संभावित संस्थाओं व व्यक्तियों की पहचान, डेटा संग्रहण एवं अपलोड प्रक्रिया तथा जन-जागरूकता अभियान की रूपरेखा पर भी विचार-विमर्श किया गया।

डीएम ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पांडुलिपियों की खोज के लिए प्रखंड स्तरीय समितियों का गठन करें। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय, मंदिर, मदरसा, पुराने विद्यालय, ऐतिहासिक स्थल एवं धार्मिक संस्थानों सहित सभी संभावित स्थानों पर पांडुलिपियों की खोज सुनिश्चित की जाए और संभावित पांडुलिपियों का विस्तृत सूचीकरण किया जाए। बैठक में राजेंद्र पुस्तकालय सहित अन्य पुस्तकालयों में पांडुलिपियों की जांच, जिला अभिलेखागार (रिकॉर्ड रूम) का परीक्षण तथा कैथी लिपि सहित अन्य प्राचीन लिपियों में उपलब्ध पांडुलिपियों को चिन्हित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही ऐसे व्यक्तियों की पहचान करने को कहा गया जिनके पास परंपरागत रूप से पांडुलिपियां संरक्षित हैं।

उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार झा ने स्थानीय एवं अंचलिक भाषाओं, विशेषकर सुरजापुरी भाषा से संबंधित पांडुलिपियों की खोज पर विशेष बल दिया। वहीं जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी प्रहलाद कुमार ने बताया कि जिला स्तरीय समिति का गठन किया जा चुका है तथा प्राप्त पांडुलिपियों को “ज्ञान भारतम्” मोबाइल एप के माध्यम से अपलोड किया जाएगा। जिलाधिकारी ने कहा कि पांडुलिपियां हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं, जिनका संरक्षण एवं डिजिटलीकरण अत्यंत आवश्यक है।

हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह