Sawan 2026: बनारस में विराजते हैं पाकिस्तानी महादेव, हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बंटवारे के समय की बताता है कहानी

वाराणसी में 1947 में हिंदुस्तान-पाकिस्तान बंटवारे के मंजर की क़ई यादें आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं. ऐसे में महादेव की नगरी काशी में भी पाकिस्तान के शिवलिंग के रूप में पाकिस्तानी महादेव का मन्दिर बंटवारें की उस स्मृति को संजोए हुए हैं. वाराणसी के शीतला घाट पर विराजमान पाकिस्तानी महादेव भक्तों की मुराद को पूरी करते हैं. पाकिस्तानी महादेव के इस मंदिर में हिन्दू-मुस्लिम हर वर्ग के लोग बाबा के दर्शन करने आते हैं.

 

वाराणसी में 1947 में हिंदुस्तान-पाकिस्तान बंटवारे के मंजर की क़ई यादें आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं. ऐसे में महादेव की नगरी काशी में भी पाकिस्तान के शिवलिंग के रूप में पाकिस्तानी महादेव का मन्दिर बंटवारें की उस स्मृति को संजोए हुए हैं. वाराणसी के शीतला घाट पर विराजमान पाकिस्तानी महादेव भक्तों की मुराद को पूरी करते हैं. पाकिस्तानी महादेव के इस मंदिर में हिन्दू-मुस्लिम हर वर्ग के लोग बाबा के दर्शन करने आते हैं.

मंदिर का नाम क्यों पड़ा पाकिस्तानी मंदिर
सावन में तो यहां भक्तों का रेला लग जाता है. अपने नाम से ही कौतूहल पैदा करने वाला यह शिवलिंग लोगों के लिए आस्था का बहुत बड़ा केंद्र है. स्थानीय लोगों के अनुसार सरकारी दस्तावेजों में भी इस मंदिर का नाम पाकिस्तानी महादेव के नाम से दर्ज है. अब सवाल यह उठता है कि इस मंदिर का नाम पाकिस्तान से क्यों जोड़ा जाता है.

शीतला घाट पर है मंदिर
काशी में पाकिस्तानी महादेव का मंदिर शीतला घाट पर स्थित है। यहां पहुंचने के लिए वाराणसी रेलवे स्टेशन से रथयात्रा गोदौलिया मार्ग से होते हुए दशाश्वेध घाट पहुंचना होता है इसी के बगल में शीतला घाट है जहां बाबा विराजते हैं।

बंटवारे की दास्तान भी है शिवलिंग
ये अनोखा शिवलिंग। सरकारी दस्‍तावेजों में इसे पाकिस्‍तानी महादेव के नाम से पुकारा जाता है। यह शिवलिंग अपने आप में आज़ादी के बाद हुए बटवारे की दास्‍तान संजोये हुए है।

दर्शन का है खासा महत्व
गंगा नदी के किनारे स्थित शीतला घाट पर बने पाकिस्तानी महादेव में लोग गंगा में स्नान के बाद दर्शन करते हैं। महाशिवरात्रि के अतिरिक्त सावन में भी भक्त दर्शन करके मनचाही मुराद पूरी करते हैं।

दो व्यापारी लाहौर से लाये थे शिवलिंग
पाकिस्तानी महादेव की कहानी बेहद दिलचस्प है। भारत व पाकिस्तान में बंटवारे के समय दोनों देशों के नागरिक एक-दूसरी जगह पर गये थे। लाहौर से दो हीरा व्यापारी जमुना दास व निहाल चंद्र काशी आये थे। कहा जाता है कि दोनों ही व्यापारी जब पाकिस्तान से बनारस आ रहे थे तो अपने साथ वहां से खास शिवलिंग लेकर आये थे।

गंगा में प्रवाहित करना था पर घाट पर स्थापित हुए शिव जी
दोनों ही व्यापारियों की इच्छा थी कि इस शिवलिंग को बनारस में जाकर गंगा में प्रवाहित कर देंगे। बनारस आने के बाद शिवलिंग को गंगा में प्रभावित करने की जगह शीतला घाट पर ही स्थापित कर दिया गया। पाकिस्तान से शिवलिंग लाने के कारण मंदिर का नाम पाकिस्तानी महादेव पड़ गया। इसके बाद से मंदिर को पाकिस्तानी महादेव के ही नाम से जाना जाता है जहां पर दर्शन करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है।

सरकारी अभिलेखों में भी दर्ज है पाकिस्तानी शिव मंदिर का नाम
क्षेत्रीय पार्षद और मंदिर के संयोजक अजीत ने बताया कि यह बात सिर्फ कहावत नहीं है। इस मंदिर का नाम नगर निगम के साथ साथ विकास प्राधिकरण में भी पाकिस्तानी महादेव के नाम से ही दर्ज है। जिससे इस बात की पुष्टि होती है कि यह पाकिस्तानी शिव मंदिर है।

सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़
सावन में शिव की नगरी काशी में भक्तों का रेला लगा रहता है। ये शिव भक्त शीतला घाट पर स्थित इस पाकिस्तानी मंदिर में भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।शिव का प्रिय मास सावन होने के कारण इस समय बाबा को जल चढ़ाने वालों की लंबी कतार लगी रहती है।