क्या आपने पी है रागी अंबली? प्रोबायोटिक्स से भरपूर यह साउथ इंडियन ड्रिंक पेट को रखती है ठंडा, जानें रेसिपी

आजकल लोग सेहतमंद रहने के लिए पारंपरिक और पौष्टिक पेयों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। ऐसे ही एक खास और बेहद पौष्टिक दक्षिण भारतीय पेय का नाम है रागी अंबली। यह न केवल स्वाद में अलग और ताज़गीभरा होता है, बल्कि प्रोबायोटिक्स, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्वों से भी भरपूर माना जाता है। गर्मियों के मौसम में इसे विशेष रूप से पसंद किया जाता है क्योंकि यह शरीर को ठंडक पहुंचाने, पाचन को बेहतर बनाने और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है। रागी और दही से तैयार होने वाली यह पारंपरिक ड्रिंक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। आइए जानते हैं इसे बनाने की आसान विधि।

 

आजकल लोग सेहतमंद रहने के लिए पारंपरिक और पौष्टिक पेयों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। ऐसे ही एक खास और बेहद पौष्टिक दक्षिण भारतीय पेय का नाम है रागी अंबली। यह न केवल स्वाद में अलग और ताज़गीभरा होता है, बल्कि प्रोबायोटिक्स, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्वों से भी भरपूर माना जाता है। गर्मियों के मौसम में इसे विशेष रूप से पसंद किया जाता है क्योंकि यह शरीर को ठंडक पहुंचाने, पाचन को बेहतर बनाने और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है। रागी और दही से तैयार होने वाली यह पारंपरिक ड्रिंक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। आइए जानते हैं इसे बनाने की आसान विधि।

रागी अंबली बनाने के लिए आवश्यक सामग्री

1 कप रागी का आटा
1 कप सामान्य पानी
3 कप गर्म पानी
5 कप अतिरिक्त पानी
1 कप दही
2 हरी मिर्च
1 इंच अदरक का टुकड़ा
10 से 15 करी पत्ते
ताजा हरा धनिया
स्वादानुसार नमक

रागी अंबली बनाने की विधि

पहला चरण: रागी का घोल तैयार करें

सबसे पहले एक बड़े बर्तन में रागी का आटा लें और उसमें एक कप पानी मिलाएं। इसे अच्छी तरह फेंटते रहें ताकि कोई गांठ न रहे और एकदम मुलायम तथा पतला घोल तैयार हो जाए। यह स्टेप बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे ड्रिंक का टेक्सचर बेहतर बनता है।

दूसरा चरण: रागी को पकाएं

अब गैस पर एक कड़ाही या पैन रखें और उसमें तीन कप पानी उबालें। जब पानी अच्छी तरह उबलने लगे, तब तैयार रागी का घोल धीरे-धीरे डालें और लगातार चलाते रहें। मध्यम आंच पर इसे पकाएं ताकि मिश्रण नीचे चिपके नहीं। कुछ ही देर में यह गाढ़ा होने लगेगा।

जब मिश्रण पर्याप्त गाढ़ा हो जाए, तब गैस बंद कर दें और बर्तन को ढककर 3 से 4 मिनट तक भाप में रहने दें। इससे रागी अच्छी तरह पक जाती है और उसका स्वाद भी निखरकर आता है। इसके बाद मिश्रण को पूरी तरह ठंडा होने के लिए रख दें।

तीसरा चरण: फर्मेंटेशन की प्रक्रिया

रागी अंबली का असली स्वाद और पौष्टिकता इसके फर्मेंटेशन से आती है। इसके लिए एक मिट्टी का बर्तन या बड़ा कंटेनर लें और उसमें पांच कप पानी डालें। अब ठंडे हो चुके रागी मिश्रण को छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़कर पानी में डालते जाएं।

जब पूरा मिश्रण पानी में मिल जाए, तब बर्तन को ढककर 8 से 10 घंटे के लिए छोड़ दें। इस दौरान प्राकृतिक फर्मेंटेशन की प्रक्रिया शुरू होगी। जब सतह पर हल्के बुलबुले दिखाई देने लगें और मिश्रण से हल्की खट्टी सुगंध आने लगे, तो समझिए कि रागी अंबली तैयार होने के करीब है।

चौथा चरण: दही और मसालों का स्वाद जोड़ें

फर्मेंटेशन पूरा होने के बाद रागी के टुकड़ों को हाथ या मथनी की सहायता से अच्छी तरह मसलें ताकि वे पूरी तरह पानी में घुल जाएं। अब इसमें दही डालें और अच्छी तरह फेंट लें, जिससे मिश्रण एकदम स्मूद और क्रीमी बन जाए।

इसके बाद हरी मिर्च, अदरक, करी पत्ता और हरे धनिये को बारीक काट लें। इन सभी सामग्री को नमक के साथ तैयार अंबली में मिला दें और एक बार फिर अच्छी तरह चलाएं।

तैयार है ठंडक और पोषण से भरपूर रागी अंबली

अब आपकी पारंपरिक दक्षिण भारतीय रागी अंबली पूरी तरह तैयार है। यह ड्रिंक गर्मी के दिनों में शरीर को हाइड्रेट रखने, पेट को ठंडक पहुंचाने और पाचन तंत्र को संतुलित बनाए रखने में मदद कर सकती है। साथ ही, इसमें मौजूद प्राकृतिक प्रोबायोटिक्स आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी सहायक माने जाते हैं। स्वाद और सेहत का यह अनोखा संगम एक बार जरूर आजमाएं।