योगी सरकार वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए कराएगी अत्याधुनिक सामान्य सुविधा केन्द्रों का निर्माण 

 
 ओडीओपी और जीआई उत्पादों के विकास के लिए मिलेगा एक छत 

 डिजाइनिंग, टेक्नोलॉजी, गुणवत्ता परीक्षण लैब, आर एण्ड डी, अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार पैकेजिंग आदि की विश्वस्तरीय सुविधाएं होगी 

सरकार ओडीओपी और जीआई से जुड़े उद्यमियों को सीएफसी के निर्माण के लिए देगी 90 प्रतिशत का अनुदान 

डाईंग और डिजिटल प्रिंटिंग के लिए पहले से सफलतापूर्वक संचालित हो रहा एक सीएफसी 

वाराणसी ,7 मई काशी की हस्तकला को योगी सरकार ने वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार वाराणसी की ओडीओपी और जीआई पंजीकृत उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा और चुनौतियों से मुकाबला के लिए हर प्रकार से तैयार करेगी। इसके लिए सरकार ओडीओपी और जीआई क्षेत्रों में कार्यरत अनुभवी उद्यमी समूहों एवं संस्थाओं को अत्याधुनिक सामान्य सुविधा केन्द्र स्थापित किए जाने का मौका दे रही है। जिसमे इच्छुक उद्यमी को मात्र 10 प्रतिशत धन लगाना होगा, शेष राशि सरकार वहन करेगी। 
योगी सरकार हेंडीक्राफ्ट से जुड़े उद्यमियों को सीएफसी स्थापित करने का बड़ा मौका दे रही है जिससे आय के साथ ही बनारस की ओडीओपी और जीआई उत्पादों को नया मुकाम मिलेगा। जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र के उपायुक्त अभिषेक प्रियदर्शी ने बताया कि सिल्क उत्पाद,  सिल्क उत्पाद, (बनारसी साड़ी) वुडेन से लेकर वेयर एण्ड ट्वायज ( लकड़ी के खिलौने ) तथा गुलाबी मीनाकारी के लिए अत्याधुनिक सामान्य सुविधा केन्द्र स्थापित जाना प्रस्तावित है। इसके लिए जिला प्रशासन एवं उद्योग विभाग ने संबंधित क्षेत्रों में कार्यरत अनुभवी उद्यमी समूहों एवं संस्थाओं से एक्सप्रेशन ऑफ़ इंट्रेस्ट आमंत्रित की है। 

विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेगी एक छत के नीचे 
उपायुक्त जिला उद्योग ने जानकारी दिया कि प्रस्तावित सीएससी केन्द्रों का उद्देश्य स्थानीय शिल्पकारों और उद्यमियों को आधुनिक तकनीक एवं विश्व स्तरीय सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है। सीएफसी में आधुनिक डिजाइनिंग ,टेक्नोलॉजी, गुणवत्ता परीक्षण लैब ,रिसर्च एन्ड डेवलपमेंट तथा अंतर्राष्ट्रीय मानकों की पैकेजिंग जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं होंगी। सरकार के इस पहल से वाराणसी के पारंपरिक उत्पादों की गुणवत्ता और अंतर्राष्ट्रीय बाजार प्रतिस्पर्धा में अच्छी वृद्धि होने की उम्मीद है।

सीएफ़सी के लिए पात्रता व अनुदान 
उद्योग विभाग के अनुसार, ऐसे उद्यमी समूह या विशेष प्रयोजन वाहन के पास 20 हज़ार वर्ग फिट ज़मीन होना आवश्यक है, एसवीपी में कम से कम 20 सदस्य और 'नो प्रॉफिट नो लॉस' की कंपनी होनी चाहिए। सरकार सीएफ़सी के लिए 90 प्रतिशत अनुदान देगी, एसवीपी को मात्र 10 प्रतिशत जी खर्च करना होगा। ऐसा मानना है कि इन आधुनिक क्लस्टर विकास परियोजनाओं से स्थानीय उद्योगों को निर्यात के नए अवसर मिलेंगे और शिल्पियों की आय में भी वृद्धि होगी। जो आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास में रुचि रखते हैं, वे 30 मई तक अपना ईओई प्रस्ताव जमा कर सकते हैं। 

पहले से सफलता पूर्वक संचालित हो रहा एक सीएफसी 
योगी सरकार की योजना से वाराणसी में लगभग 9.74 करोड़ के लागत से जगतपुर में अप टाउन वेलफेयर फाउंडेशन के नाम से सीएफसी संचालन हो रहा है। इस सीएफसी में डाईंग और डिजिटल प्रिंटिंग का कार्य होता है ,जिससे बनारसी सिल्क से जुड़े लोगों को अपने व्यवसाय में सुविधा और सुलभता प्राप्त हो रहा है।